ई दिल्ली – दिल्ली कांग्रेस के कभी अध्यक्ष रहे और तीन-तीन बार मंत्री रह चुके अरविंदर सिंह लवली जब पिछले साल अप्रैल में बैंड -बाजे के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे तो लगा था कि केन्द्र में शासन कर रही भाजपा ने बड़ा तीर मार लिया लेकिन लगभग दस महीने बाद जिस तरह से लवली ने कांग्रेस में वापसी की है, वह अलग और मोहभंग की तस्वीर है। दिल्ली नगर निगम चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस में कुंठित हो चुके लवली जब भारतीय जनता पार्टी में आए थे तो उन्होंने दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अजय माकन पर पार्टी को बर्बाद करने का ठीकरा फोड़ा था। तब जिस तरह दिल्ली में आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल अपनी पकड़ मजबूत कर चुके थे और कांग्रेस किसी दुष्चक्र के चलते पुराने नेताओं और खास तौर से शीला दीक्षित और उनके समर्थकों की अनदेखी कर रही थी, उसमें वे या तो चुप बैठने पर मजबूर हुए या फिर दूसरी जगह ठौर तलाशने लगे। लवली दूसरी श्रेणी के नेता थे। खासा जनाधार रहा है उनका यमुनापार इलाके और दिल्ली के सिख प्रभावित क्षेत्रों में। उन्होंने भाजपा की शरण ली। विजय गोयल, मनोज तिवारी की जय-जयकार हुई।













