छिंदवाड़ा(भगवानदीन साहू) – जिला कलेक्टर शीतला पटले के आदेशानुसार , जिला पशु चिकित्सालय के उप संचालक डॉ. पक्षवार और डॉ. टांडेकर के निर्देश पर सन्त श्री आशारामजी गौशाला खजरी ने शहर में जगह – जगह स्टॉल लगाकर होलिका दहन हेतु कण्डे उपलब्ध करवाए । कण्डे से होलिका दहन सम्पूर्ण पर्यावरण शुद्ध होता है और जंगलों की अनावश्यक कटाई पर भी रोक लगती है। गाय के गोबर से बने कण्डे से होलिका दहन की हमारी वैदिक परम्परा भी है । गत कई वर्षों से पूज्य बापूजी की गौशाला प्रति वर्ष हजारों की संख्या में कण्डे का निर्माण कर आम लोगों को उचित मूल्य पर एवं अन्य धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों को निःशुल्क भेंट करती है । होलिका दहन के समय ऋतु परिवर्तन होता है। ठंड का मौसम समाप्त होकर ग्रीष्म ऋतु प्रांरभ होती है। इस दौरान सर्दी , जुखाम , बुखार के मरीजों की अधिकता रहती है। कण्डे के होलिका दहन से वातावरण में फैले विषैले कीटाणुओं का भी अंत होता है। होलिका दहन के बाद धुरेड़ी का पर्व मनाने की परंपरा है। आम जनमानस को केमिकल रंगों से होने वाली हानि से बचाने हेतु पलाश के फूलों से बने रंगों के पैकेट निःशुल्क वितरित किये गए। जिला जेल अधीक्षक को एवं सभी बंदियों के लिए एवं अन्य कई धार्मिक संगठनों को भी पलाश के फूलों से बने रंगों के पैकेट भेंट किये । इसे वैदिक होली कहतें हैं । शास्त्रों में आता है कि पलाश के फूलों से बने रंग से होली खेलने से कालसर्प योग से मुक्ति मिलती है। वहीं त्वचा के कई रोगों से छुटकारा तथा वात , पित्त और कफ जनित बीमारियों से भी राहत मिलती हैं । पूज्य बापूजी के देशभर में 550 आश्रम हैं। सभी आश्रमों में गौशाला होती ही है। इस प्रकार की सेवा सभी जगह हो रही है । इस दैवीय कार्य में साध्वी रेखा बहन , साध्वी प्रतिमा बहन , समिति के अध्यक्ष मदनमोहन परसाई , खजरी गौशाला के संचालक जयराम भाई , गुरूकुल की संचालक दर्शना खट्टर , युवा सेवा संघ के अध्यक्ष दीपक डोईफोड़े , सुजीत सूर्यवंशी , महेश चुगलानी , अश्विन पटेल , धनाराम सनोडिया , महिला समिति से विमल शेरके , छाया सूर्यवंशी , दीपा डोडानी , डॉ. मीरा पराडकर , मीणा गोधवानी , शकुंतला कराड़े , आदि ने अपनी- अपनी सेवाए दीं ।













