बांग्लादेश – बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया की भ्रष्टाचार के एक मामले में पांच साल की सजा ने बांग्लादेश की भविष्य की राजनीति को चौराहे पर ला खड़ा किया है। 1971 में भारत के रणनीतिक हस्तक्षेप से वजूद में आया यह देश यहां से किस दिशा में जाएगा यह कह पाना मुश्किल है। खालिद जिया और उनके बेटे पर लगे आरोप को अदालत ने सही पाया है। दरअसल, इस फैसले को जहां एक तरफ मौजूदा प्रधानमंत्री और खालिद जिया की कट्टर विरोधी शेख हसीना न्यायिक प्रक्रिया की तार्किक परिणति बता रही हैं वहीं खालिदा जिया के समर्थकों ने इस फैसले को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बता कर न सिर्फ पूरे देश में अराजकता का माहौल पैदा कर दिया है बल्कि इसकी भी संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि उनकी पार्टी (बीएनपी) इस साल के अंत में होने वाले आम चुनावों का बहिष्कार कर सकती है। यहां गौरतलब है कि बीएनपी ने पिछले आम चुनावों का जो 2013 में हुए थे का भी चुनाव मशीनरी पर संभावित धांधली का आरोप लगाते हुए चुनाव का बहिष्कार किया था। बीएनपी की परेशानी इस तथ्य से भी बढ़ गई है कि पार्टी ने खालिदा जिया के जिस बेटे तारिक रहमान को पार्टी का अध्यक्ष घोषित किया है उन्हें भी इसी मामले में दस साल की सजा सुनाई गई है और वह पहले से ही इंग्लैंड में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं। यानी इस समय बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी की हैसियत रखने वाली बीएनपी पूरी तरह से नेतृत्वविहीन है। यह स्थिति इस वजह से और भी बिगड़ती दिख रही है कि बांग्लादेश की जनमानस वंशवादी राजनीति की आदी रही है और वह बीएनपी के शीर्ष नेतृत्व पर जिया परिवार के अलावा किसी और को स्वीकार नहीं कर पाएगी।













