पटियाला, 16 फरवरी (प्रेस की ताकत ब्यूरो) जगद्गुरु पंचानन्द गिरि जी महाराज धर्माधीश श्री हिन्दू तख्त एवं हिन्दू सुरक्षा समिति के प्रमुख, श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के जगद्गुरु, माता कामाख्या देवी आसाम एवं श्री मां ज्वाला जी हिमाचल प्रदेश का आज सुबह मोहाली के मैक्स अस्पताल में देहांत हो गया, वे तीन दिनों से स्वास्थय ठीक न होने के कारण दाखिल थे। उनके देहांत से पूरे हिन्दूओं में दुःख का माहौल है।
जगदगुरु पंचानन्द गिरि जी महाराज की पार्थिव देह को मैक्स अस्पताल मोहाली से अंतिम दर्शनों हेतू चंडीगढ़ बुड़ैल सैक्टर 45 में स्थित ज्वाला जी मन्दिर ले जाया गया जिसके बाद ढकोली जीरकपुर डेरे पर पार्थिव देह को ले जाया गया जहां पर सैंकड़ों भक्तों के अंतिम दर्शन किए।
जगदगुरु पंचानन्द गिरि जी महाराज की पार्थिव देह को फिलहाल पटियाला के श्री काली माता मन्दिर के श्री शिव शक्ति सेवा दल लंगर चैरीटेबल ट्रस्ट के लंगर भवन में भक्तांे के अंतिम दर्शनों हेतू रखा गया है जहां लोग लंबी लंबी लाईनों मंे पंचानन्द गिरि जी के अंतिम दर्शन कर रहे हैं।
वहीं विभिन्न अखाड़ों से संत, महंत, महा मंडलेश्वर बड़ी संख्या में अंतिम दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं।
ज्ञात रहे कि जगदगुरु पंचानन्द गिरि जी महाराज का जन्म 29 जुलाई 1971 पटियाला में हुआ था तथा 9 वर्ष की आयू से ही हिन्दू सुरक्षा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष शेरे ए हिन्द श्री पवन कुमार शर्मा की अध्यक्षता में अपना जीवन हिन्दूत्व को समर्पित करते हुए खालिस्तान विरोधी लहर में शामिल हो गए।
धीरे धीरे हिन्दू सुरक्षा समिति के अध्यक्ष बने तथा साथ ही हिन्दूत्व के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए उन्हें विश्व के सबसे बड़े पंचदशनाम जूना अखाड़े ने उन्हें महांमंडलेश्वर नियुक्त कर दिया तथा बाद में उन्हें जगद्गुरु की उपाधि से शुशोभित किया। यहीं नहीं माता कामाख्या देवी आसाम एवं श्री मां ज्वाला जी हिमाचल प्रदेश के भी पंचानन्द गिरि जी महाराज पीठाधीश्वर नियुक्त किए गए तथा आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा 2500 साल पहले स्थापित श्री हिन्दू तख्त का उन्हे पीठाधीश्वर नियुक्त किया गया।
इतनी उपाधियों से शुशोभित होने बावजूद पंचानन्द गिरि जी महाराज संतों, धार्मिक गुरुओं, सनातन धर्म के आज्ञावानों, विभिन्न पाटिर्यों के राजनीतिज्ञों यहां तक कि हर साधारण व्यक्ति के साथ उनके मैत्रीपूर्ण संबंध थे।













