पटियाला के प्रसिद्ध मंदिर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात, जानें क्यों
पटियाला, 20 सितंबर (प्रेस की ताकत ब्यूरो) : पटियाला से अहम खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार पटियाला में देर रात नगर निगम द्वारा पुलिस की मदद से श्री काली माता मंदिर के सामने से छोटी दुकानों को हटाया गया। इस दौरान भारी पुलिस फोर्स मौजूद रही। नगर निगम ने बिना किसी सूचना के अचानक ये बड़ी कार्रवाई की है।
आपको बता दें कि कुछ दिन पहले भी इन्हें हटाने के लिए कार्रवाई करने की कोशिश की गई थी पर धरने के कारण ऐसा नहीं हो पाया। इसके बाद देर रात चुपचाप ये कार्रवाई पूरी की गई।
पटियाला में नगर निगम की बड़ी कार्रवाई:श्री काली माता मंदिर के पास अवैध कब्जे हटाए गए, दुकानदारों ने किया प्रदर्शन
पटियाला के श्री काली माता मंदिर के बाहर लगी अवैध रेहड़ी व दुकानों पर मंगलवार देर रात को नगर निगम की टीम ने कार्रवाई की। निगम ने इन रेहड़ी व दकानों के खिलाफ कार्यवाई करने के लिए भारी पुलिस फोर्स की मदद ली। निगम की टीम ने मौके से पहुंचने से पहले ही 100 के करीब पुलिस मुलाजिमों को तैनात करवाया था। ताकि किसी भी तरह के टकराव को रोक सके। इसके बाद नगर निगम ने ट्रैक्टर ट्रालियों में सामान भरकर उठा लिया और इलाका पूरी तरह से खाली करवा लिया।
कुछ दुकानदारों को तो देर रात पता चला, जबकि कुछ दुकानदार बुधवार सुबह अपनी रेहड़ी पर पहुंचे तो, देखा कि पूरा सामान वहां से गायब था। नगर निगम की यह कार्रवाई श्री काली माता मंदिर के आसपास के एरिया में हुई है। घटना के बाद दुकानदारों ने इकट्ठे होकर नगर निगम व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और आरोप लगाया है कि यह पूरी तरह से धक्केशाही है।
दुकानदारों ने कहा- हमारा लाखों का सामान गायब
दुकानदार बिट्टू ने कहा कि उन्हें बुधवार सुबह इस बारे में पता चला कि सामान निगम उठा ले गई है। लेकिन कहां पर ले गई है, यह पता नहीं चल पाया है। उनकी मांग है कि सामान लौटा दिया जाए, क्योंकि सामान न मिलने पर उन्हें काफी हो सकता है। इसमें उनका लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।
बिना किसी चेतावनी के एक्शन लेने के आरोप
मौके पर खड़े दुकानदारों ने कहा कि नगर निगम व प्रशासन ने पहली बार रात के समय बिना किसी चेतावनी के कार्रवाई की है। निगम की तरफ से उन्हें कोई चेतावनी नहीं मिली कि वह अपना सामान समेट सके। उनकी आजीविका इस रेहड़ी व फड़ी से चलती थी। रेहड़ी पर वह मंदिर का प्रसाद व अन्य सामान ही बेचते थे और पूरे परिवार की कमाई इस पर निर्भर होती थी। इस तरह की कार्रवाई से उनका परिवार सड़क पर आ गया है। मंदिर के प्रबंधकों से संपर्क किया तो, इन लोगों ने मीटिंग में चंडीगढ़ होने की बात कहकर मामले को टाल दिया है।













