भारत के पड़ोसी देश नेपाल एक बार फिर भूकंप की चपेट में है. 3 नवंबर की देर रात आई भूकंप की वजह से करीब 140 लोगों की मौत हो गई है. नेपाल भूकंप मापन केंद्र के मुताबिक भूकंप का केंद्र जोजरकोट था और रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.4 मापी गई.
इसबार भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित जोजरकोट और रूकुम जिला है. स्थानीय अखबार कान्तिपुर के मुताबिक जोजरकोट में 95 और रूकुम में 36 लोगों की मौत हो गई है. राहत बचाव कार्यों के लिए नेपाल सेना ने 3 हेलिकॉप्टर उतारे है.
नेपाल में पिछले 8 साल में 5वां मौका है, जब धरती हिलने से जान-माल की बड़े स्तर पर हानि हुई है. नेपाल में इन 8 सालों में भूकंप की वजह 10 हजार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. यह सिर्फ सरकारी आंकड़ा है.
इन्हीं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2015 के भूकंप की वजह से 80 लाख लोग नेपाल में प्रभावित हुए थे.
भूकंप, एपिक सेंटर और फोकस क्या है?
भूकंप का अर्थ होता है पृथ्वी का कंपन. इसे प्राकृतिक आपदा माना गया है. भूवैज्ञानिकों के अुसार भूपर्पटी की शैलों के गहन दरारों को भ्रंश कहा जाता है. भ्रंश से ही उर्जा निकलने के कारण भूकंप आता है. भूपर्पटी पृथ्वी का सबसे बाहरी भाग है.
जिस स्थान से उर्जा निकलती है, उसे भूकंप का उद्गम स्थान (फोकस) कहा जाता है. उद्गम स्थान को ही अवकेंद्र (हाइपोसेंटर) भी कहते हैं.
भ्रंश से उर्जा निकलने के बाद अलग-अलग दिशाओं में चलती हुई पृथ्वी की सतह तक पहुंचती है. भूतल के उस बिंदु को एपिक सेंटर कहा जाता है, जो फोकस के करीब होता है. भूंकप का मापन एपिक सेंटर से ही किया जाता है.
भूवैज्ञानिकों के मुताबिक एपिक सेंटर फोकस के ठीक ऊपर 90 डिग्री के कोण पर होता है. भूकंप का मापन रिक्टर स्केल पर किया जाता है. इसकी तीव्रता 0 से लेकर 10 तक हो सकती है.
नेपाल में बार-बार क्यों आता है भूकंप?
बड़े भूकंप को छोड़ दिया जाए, तो नेपाल में पिछले 2 साल में छोटे-छोटे भूकंप 100 से भी ज्यादा बार आए हैं. नेपाल भूकंप मापन केंद्र के मुताबिक इसी साल देश में अब तक भूकंप के 70 छोटे-बड़े झटके महसूस किए गए हैं. भूकंप के अधिकांश झटकों की तीव्रता 4 से अधिक थी.
हिमालय की तलहटी पर बसे नेपाल के नीचे 2 बड़े टोक्टोनिक प्लेट है. इसमें एक का नाम इंडो-ऑस्ट्रेलियन और दूसरे का नाम यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट है. जब इन दोनों प्लेटों की टक्कर होती है, तो नेपाल में भूकंप के झटके आते हैं.
वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालय क्षेत्र में पृथ्वी की इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे दबती जा रही है और इससे हिमालय ऊपर उठता जा रहा है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल लगभ पांच सेंटीमीटर इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट यूरेशियन प्लेट के नीचे जा रही है. इसकी वजह से हर साल हिमालय पांच मिलीमीटर ऊपर उठता जा रहा है.
भूकंप से मरते लोग, वजह सिर्फ टेक्टोनिक प्लेट का टकराना है?
बड़ा सवाल यही है कि नेपाल में बार-बार भूकंप क्यों आ रहा है और इससे मरने वाले लोगों के पीछे कौन जिम्मेदार है? नेपाल सरकार भूकंप आने पर हर बार प्राकृतिक आपदा की दुहाई देकर पल्ला झाड़ लेती है और घटना के बाद दुनिया के अन्य देशों से मदद लेकर राहत-बचाव कार्य शुरू कर देती है.
ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या सिर्फ टेक्टोनिक प्लेट का टकराना ही नेपाल में हजारों का मौत का कारण है.
1. बिल्डिंग कोड का पालन नहीं- 2015 में भूकंप आने के बाद नेपाल सरकार ने बिल्डिंग कोड को सख्ती से लागू करने की बात कही थी. सरकार ने बिना इंजीनियर परमिशन के बिल्डिंग बनाने पर रोक लगा दी. शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में भूकंप रोधी घर बनाने के निर्देश दिए.
इतना ही नहीं, पुराने घरों को तोड़कर नए सिरे से घर बनाने की बात कही गई, जिससे भूकंप आने पर जानमाल की हानि कम हो.
हालांकि, बिल्डिंग कोड का पालन बढ़िया तरीके से नहीं किया गया. 2021 में नेपाल की हाउसिंग रिकवरिंग रिकंसट्रक्शन प्लेटफॉर्म (एचआरआरपी) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि बिल्डिंग कोड को बेहतर तरीके से पालन नहीं किया गया है.
एचआरआरपी के मुताबिक नेपाल के अधिकांश नगर निगम और नगरपालिका में दक्ष अधिकारियों की कमी है. बिल्डिंग कोड लागू नहीं होने में यह भी एक बड़ी वजह है.
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक देश की सरकार आमतौर पर काठमांडु के ही विकास पर ज्यादा फोकस करती है. इसके अलावा अन्य जगहों के काम पर ज्यादा ध्यान नहीं देती है.
स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी के भूवैज्ञानिक साइमन क्लैंपर्र कहते हैं- नेपाल में बिल्डिंग कोड अगर सख्ती से लागू नहीं होगा, तो भूकंप का प्रभाव बढ़ता जाएगा. उनके मुताबिक आने वाले वक्त में भारत को भी इसका नुकसान हो सकता है.
साइंस पत्रिका के मुताबिक नेपाल में कई बड़े सरकारी भवन भूकंपरोधी नहीं है. देश में 80 हजार सरकारी स्कूल है. इनमें से आधे से ज्यादा स्कूल भूकंपरोधी नहीं है.
2. हिमालय क्षेत्र में अतिक्रमण जारी- जनवरी 2022 में अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण पत्रिका मोंगाबे ने ‘चीन के निर्माण कार्य से हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में है’ शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इस रिपोर्ट में बताया गया था कि कैसे नियमों की अवहेलना कर हिमालय के परिस्थितिकी तंत्र को खतरे में पहुंचाया जा रहा है.
रिपोर्ट में बताया गया था कि चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट के लिए हिमालय की तलहटी को नष्ट किया जा रहा है. साथ ही यह भी बताया गया था कि रोड परियोजना के निर्माण के लिए कैसे पहाड़ों पर से पत्थर और रेत निकालकर उपयोग किया जा रहा है.
2015 भूकंप के कारणों का विश्लेषण करते हुए ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ में भू-भौतिकीविद लुका दल जिलियो लिखते हैं- 2015 में भूकंप के लिए आसपास के परिस्थितिकी ने हिमालय के प्लेट को उकसाने का काम किया.
जिलियो ने अपने विश्लेषण में कहा कि अगर इसमें सुधार नहीं हुआ, तो भूकंप की तीव्रता 8 को भी पार कर जाएगी.
वैज्ञानिक लगातार लगा रहे बड़े भूकंप का अनुमान
नेपाल को लेकर वैज्ञानिक लगातार बड़े भूकंप का अनुमान लगा रहे हैं. लुका दल जिलियो के मुताबिक नेपाल के टेक्टोनिक प्लेट के भीतर जिस तरह से उर्जा इकट्ठा हुआ है, उससे आने वाले वक्त में 8 से ज्यादा तीव्रता का भूकंप आ सकता है.
कोलराडो बोल्डर विश्विद्यालय के प्रोफेसर रोजर बिल्हम ने अपनी टीम के साथ हाल ही में नेपाल के आसपास के टेक्टोनिक प्लेट पर एक शोध किया है. इस शोध में उन्होंने खुलासा किया कि टेक्टोनिक प्लेट के 7 ऐसे खंड अभी हैं, जहां से 8.4 तीव्रता की भूकंप आ सकती है.
वे कहते हैं- भूपर्पटी से उर्जा कब निकलेगा, यह कोई नहीं कर सकता है. यह कल भी हो सकता है और 5 शताब्दी बाद भी.
2018 के अमेरिकी सिस्मोलॉजिकल सोसायटी के बुलेटिन के मुताबिक 1505 ईस्वी जैसा भूकंप अगर नेपाल में आता है, तो भारत और नेपाल के करीब 6 लाख लोगों की इससे मौत हो सकती है. अनुमान लगाया गया है कि इस भूकंप की तीव्रता 8.7 की हो सकती है.
नेपाल में कब-कब आया बड़ा भूकंप?
– रिकॉर्ड में जो जानकारी है, उसके मुताबिक नेपाल में सबसे पहला भूकंप 1255 में आया था. इसमें 2200 लोगों की मौत हो गई थी. इसके ठीक 5 साल बाद 1260 में भी भूकंप आया था, जिसमें 100 लोग मारे गए थे.
– 1312 में जबरदस्त भूकंप नेपाल में आया था. बीबीसी नेपाली सेवा के मुताबिक इस भूकंप की चपेट में राजपरिवार भी आया था और नेपाल के राजा अभय मल्ला की इसमें मौत हो गई थी. 1312 के भूकंप में एक तिहाई नेपाली नागरिक के मारे जाने का अनुमान लगाया गया था.
– इसके बाद 1934 में नेपाल में बड़ा भूकंप आया था. उस वक्त रिक्टर स्केल पर तीव्रता 8 मापी गई थी. इस भूकंप में नेपाल के 16 हजार लोग मारे गए थे. भूकंप का असर बिहार और उत्तर प्रदेश में भी हुआ था.
– 1980 में भी नेपाल में भूकंप आया था. उस वक्त तीव्रता 6.4 मापी गई थी. इस भूकंप में 200 लोगों की मौत हो गई. 5000 से ज्यादा नागरिक घायल हुए. इसके 8 साल बाद फिर भूकंप आया, जिसमें 1 हजार से ज्यादा लोग मारे गए.
– इसके बाद 2015 में भूकंप आया था. 2015 में भूकंप के 2 बड़े झटके लगे थे. इसमें 8800 लोगों के मारे जाने की पुष्टि सरकार ने की थी. भूकंप की वजह से कई पुरानी इमारते खंडहर बन गई.













