लखनऊ: भाजपा ने सपा को सियासत में हाशिएं पर लाकर खड़ा कर दिया है। उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव में समाजवादी पार्टी को भाजपा के हाथों बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। निकाय चुनाव में सपा को मिली हार की समीक्षा खुद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कर रहे हैं। उनकी तगड़ी समीक्षा में सपा के कई नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसके बाद से पार्टी में लगातार बगावती सुर सुनाई दे रहे हैं। फिरोजाबाद में पहले दो सपा नेताओं को पार्टी से निकाला गया था तो अब खुद वहां लोकसभा उपप्रभारी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में पार्टी को लगातार झटके मिल रहे हैं। समाजवादी पार्टी को यूपी के विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव निकाय चुनाव की तैयारियों में लग गये थे। मगर विधानसभा चुनाव की तरह निकाय चुनाव में भी भाजपा ने सपा का सूपड़ा साफ़ कर दिया है। इसके बाद अखिलेश यादव ने हार की समीक्षा करते हुए फिरोजबाद के पूर्व विधायक अजीम भाई और इटावा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजीव यादव को पार्टी से बाहर कर दिया था। अजीम भाई के सपा से निकाले जाने के बाद लोकसभा चुनाव उपप्रभारी गुलाम साबिर ने भी सपा से इस्तीफ़ा दे दिया है। गुलाम साबिर के साथ ही वार्ड 55 से सपा के नवनिर्वाचित पार्षद मुहम्मद अकरम ने भी इस्तीफ़ा दे दिया है। साबिर ने कहा कि सपा द्वारा 3 साल से मेहनती और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को अनदेखा किया जा रहा है। यही कारण है कि फिरोजाबाद जनपद में सपा का सिर्फ 1 विधायक बच गया है। सपा नेता ने कहा कि जनाधार रखने वाले नेताओं को पार्टी से निकाल कर दलालों को एहमियत दी जा रही है। सपा पार्षद ने कहा कि ईमानदार नेता अजीम भाई को निकाल कर सपा ने निंदा करने योग्य काम किया है।

