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हरवर्ष 14 अप्रैल “राष्ट्रीय सिख डे” मनाया जाए:-ओंकार सिंह

Jagdeep Singh by Jagdeep Singh
April 13, 2022
in Ambala
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हरवर्ष 14 अप्रैल “राष्ट्रीय सिख डे” मनाया जाए:-ओंकार सिंह
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जलियांवाला बाग नरसंहार के अमर शहीदों को कोटि-कोटि नमन।

इन वीर शहीदों के त्याग और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

जलियांवाला बाग नरसंहार की पुण्यतिथि पर इस कांड के अमर शहीदों को कोटि-कोटि नमन करते हुए इनैलो प्रदेश प्रवक्ता ओंकार सिंह ने कहाकि इस हत्याकांड के वीर शहीदों के त्याग और बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। स्वतंत्रता संग्राम को सेध देने वाले इस कांड की बदौलत ही भारत ने 1947 में ब्रिटिश शासन से आज़ादी प्राप्त की। प्रत्येक छेत्र में सिखों के योगदान व बलिदान को देखते हुए उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि हरवर्ष14 अप्रैल को “राष्ट्रीय सिख डे” मनाया जाए। उन्होंने कहाकि पंजाब के अमृतसर में स्वर्ण मन्दिर के निकट जलियाँवाला बाग में 13 अप्रैल 1919 (बैसाखी के दिन) को यह कांड हुआ था। उक्त स्थसन पर रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी जिसमें हज़ारों व्यक्ति शामिल थे। जनरल डायर नामक एक अँग्रेज ऑफिसर ने अकारण ही उस सभा में उपस्थित भीड़ पर गोलियाँ चलवा दीं जिसमें 400 से अधिक व्यक्ति मारे गए और 2000 से अधिक घायल हुए। अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484 शहीदों की सूची है। इस हत्या कांड में एक 6 सप्ताह का बच्चा भी शहीद हुआ। अनाधिकारिक आँकड़ों के अनुसार इस जघन्य हत्याकांड में 1000 से अधिक लोग मारे गए। यदि किसी एक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था तो वह घटना यह जघन्य हत्याकाण्ड ही था और यह घटना ही भारत में ब्रिटिश शासन के अंत की शुरुआत बनी। इस हत्याकांड का एक शर्मनाक पहलू यह भी है कि हत्याकांड के पश्चात मुख्यालय वापस पहुँच कर ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को टेलीग्राम किया कि उस पर भारतीयों की एक फ़ौज ने हमला कर दिया था जिससे बचने के लिए उसको गोलियाँ चलानी पड़ी। ब्रिटिश लेफ़्टिनेण्ट गवर्नर मायकल ओ डायर ने इसके उत्तर में ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर को टेलीग्राम किया कि तुमने सही कदम उठाया। मैं तुम्हारे निर्णय को अनुमोदित करता हूँ। फिर ब्रिटिश लेफ़्टिनेण्ट गवर्नर मायकल ओ डायर ने अमृतसर और अन्य क्षेत्रों में मार्शल लॉ लगाने की माँग की जिसे वायसरॉय लॉर्ड चेम्सफ़ोर्ड नें स्वीकृत कर दिया। 1997 में महारानी एलिज़ाबेथ ने इस स्मारक पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी थी। 2013 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन भी इस स्मारक पर आए थे। विजिटर्स बुक में उन्होंनें लिखा कि “ब्रिटिश इतिहास की यह एक शर्मनाक घटना थी। इस हत्याकांड के शहीदों के बलिदान को कभी भी भुलाया नही जा सकता, शहीदी के दिन उन्हें पुनः कोटि कोटि नमन है।

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