छिंदवाड़ा (भगवानदीन साहू)- कई धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों ने महामहिम राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री एवं मुख्य चुनाव आयोग के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पड़ोसी देशों से सीख लेकर देश में मुफ्त वाली योजनाओं पर पाबंदी की माँग की। ज्ञापन में बताया कि हमारा पड़ोसी देश श्रीलंका के आर्थिक हालत चिताजनक है । वहाँ की सरकार ने पुरे देश में कर्फ्यू लगा दिया है । सन 1999 में वहाँ की सोशल पार्टी ने सत्ता पाने के लालच में बिजली , पानी , राशन , बस यात्रा आदि मुफ्त योजना की शुरूआत कर आम लोगों को आलसी बना दिया । परिणामस्वरूप आज वहाँ पेट्रोल 303 रूपये , रसोई गैस 4119 ,आलू 360 प्रति किलो , प्याज 240 रू . प्रति किलो तथा चावल 500 रू . प्रति किलो के आसपास हो गया है । श्रीलंका पर विदेशी कर्ज लगभग 2.67 लाख करोड़ का है। यह देश दिवालिया घोषित होने के कगार है । उससे ज्यादा चिंताजनक बात हमारे देश में भी है , जहाँ पंजाब पर 3 लाख करोड़ , दिल्ली में 1 लाख करोड़ , तेलंगाना पर 3 लाख करोड़ , आंध्रप्रदेश पर 4.5 लाख करोड़ तथा बंगाल पर लगभग 5 लाख करोड़ का कर्ज है। यह कर्ज इन राज्यों पर श्रीलंका से कहीं ज्यादा है। हमारा देश महापुरूषों की जन्म स्थली एवं संतो की तपस्थली है ; इसलिए अभी हम सुरक्षित हैं। पड़ोसी देशों के हालात देखें तो पाकिस्तान में संसद भंग है , श्रीलंका में दंगों के बीच पूरी सरकार ने इस्तीफा दे दिया है । चीन में कोरोना उफान पर है , वहाँ लॉकडाउन है । अफगानिस्तान में तालिबान का कहर है, म्यांमार में लोकतंत्र जेल में है , रूस युद्ध में व्यस्त होने के कारण वहाँ की अर्थव्यवस्था खस्ताहाल है । अमेरिका की दादागिरी खत्म हो गई है , सम्पूर्ण विश्व के हालात चिंताजनक हैं। वर्तमान में केन्द्र की भाजपा सरकार ने गत 7 वर्षों में बेहद सराहनीय कार्य किये हैं। पर वहीं पश्चिम बंगाल में हिन्दूओं पर अत्याचार , दिल्ली दंगे में , फर्जी किसान आन्दोलनकारियों द्वारा लाल किला पर खालिस्तान का झंडा लहराया , पालघर में साधुओं की हत्या , धर्मान्तरण , लोकहितैषी निर्दोष संत आशारामजी बापू को जबरन जेल में रखना आदि – आदि जगहों पर सरकार नाकाम साबित हुई है। सरकार को चाहिए की पड़ोसी देशों के हालातों से सबक लेकर देश में मुफ्त वाली सभी योजनाओं पर शीघ्र अंकुश लगायें एवं केजरीवाल एवं ममता बेनर्जी जैसे अवसरवादी नेताओं पर लगाम लगाकर देश को वेनेजुएला जैसा देश बनने से रोका जाये । ज्ञापन देते समय शिक्षाविद विशाल चवुत्रे , आधुनिक चिंतक हरशुल रघुवंशी , कुनबी समाज के युवा नेता अंकित ठाकरे , राष्ट्रीय बजरंग दल के नितेश साहू , साहू समाज के ओमप्रकाश साहू , पवार समाज के प्रमुख हेमराज पटले , कलार समाज के प्रमुख सुजीत सूर्यवंशी , आई टी सेल के प्रमुख भूपेश पहाड़े , युवा सेवा संघ के नितिन दोईफोड़े , ओमप्रकाश डहेरिया , नारी रक्षा मंच से विमल शेरेके , डॉ. मीरा पराडकर , छाया सूर्यवंशी , करुणेश पाल , योगिता पराडकर , शकुंतला कराडे , आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

