नई दिल्ली – संसदीय सचिव बनाए गए आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों की सदस्यता खत्म होने के कगार पर है। यह आप के लिए आफत जैसी है। इससे जहां पार्टी की अंदरुनी लड़ाई बढ़ेगी वहीं, उसे फिर से चुनाव का सामना करना पड़ेगा। दूसरी ओर चुनाव आयोग के फैसले से भाजपा व कांग्रेस के लिए अपनी सियासी जमीन मजबूत करने का अवसर मिलेगा। इसे लेकर दोनों पार्टियां बेहद उत्साहित हैं। हाल की सियासी घटनाएं अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी की मुश्किलें बढ़ाने वाली है। दिल्ली में प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद उन्होंने अन्य राज्यों में अपना सियासी विस्तार की कवायद तेज कर दी थी। उन्हें सबसे ज्यादा उम्मीद पंजाब व गोवा विधानसभा चुनाव से थी। पंजाब में जहां सरकार बनाने का उनका सपना चूर-चूर हो गया। वहीं, गोवा में इनके सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।

