चावल धांधलेबाजी के खिलाफ वाइस आफ राइस मिलर्स ने उठाई आवाज
– चावल के नाम पर खिलाया जा रहा जहर
जालंधर
गोदाम में पड़ा जो चावल आम जन खा रहे हैं वो जहर से कम नही. हमारे वैज्ञानिकों ने बताया है कि 6 महीने से ऊपर चावल स्टोर करने के लिए उसे पर बार-बार पेस्टिसाइड स्प्रे करनी पड़ती है, जो फूड वैल्यू को कम तो करती ही है साथ ही खाने में जहर जैसा काम करती है. वाइस आफ राइस मिलर्स के संयोजक प्रमोद कुमार मोदी ने बताया किवाइस आफ राइस मिलर्स ने ऐसा जिम्मा उठाया है जिससे फूड वैल्यू के साथ-साथ लोगों की सेहत के साथ कोई खिलवाड़ न हो.
वाइस आफ राइस प्रमोद कुमार मोदी ने बताया कि
भारतीय खाद्य निगम
फूड कारपोरेशन आफ इंडिया)
धांधलेबाजी से फर्स्ट कम फर्स्ट आउट का आधार का नियम तोड़ रही है जिससे अरबों रुपए का चावल खराब हो रहा है,वहीं पर करोड़ो गरीब लोग, कई कई सालों से डाली जा रही अत्यधिक पेस्टीसाइड्स युक्त चावल खाने को मजबूर हो रहे हैं। पहले एफसीआइ में जो चावल पहले स्टोर होता था, वही चावल पहल के आधार पर दूसरे राज्यों में भेजा जाता था। मगर अब नीति के बदलाव से इस नियम की अनदेखी हो रही है। जहां पर 2023 और 24 का लाखों टन चावल गोदामों में पड़ा है, जिसको संभालने के लिए रोजाना पेस्टिसाइड (जहरीली) दवाइयों का छिड़काओ हो रहा है और दूसरी ओर 2024 और 25, 2025 और 26 का चावल भेजा जा रहा है। इस कारण से गोदामों में पड़ा पुराना चावल मनुष्य के खाने योग्य नहीं बचेगा। इसका मुआवजा गरीब लोग जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से चावल लेकर खाते उनको भुगतना पड़ता है। भारतीय खाद्य निगम पहले आये, पहले जाए,के आधार पर ही चावल भेजे, तभी भारत की गरीब जनता अत्यधिक पेस्टीसाइड युक्त चावल खाने से बच सकेगी। अन्यथा अरबों रुपए के नुकसान के साथ साथ गरीब आदमी के सेहत से खिलवाड़ होता रहेगा।
प्रमोद कुमार मोदी ने कहा लोगों के हित के लिए वाइस आफ राइस मिलर्स का गठन किया गया है जो लोक हित की मुहिम को शुरू करने जा रहे हैं ताकि स्वस्थ समाज का सपना पूरा हो सके.
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