हरियाणा के सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री के.एम. पांडुरंग ने कहा कि विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों की प्रतिभा को किसी भी सीमा में नहीं बांधा जा सकता। उनकी शारीरिक चुनौती उनकी क्षमता की अंतिम पहचान नहीं होती। यदि उन्हें सही अवसर, प्रशिक्षण, इलाज, प्यार और भरोसा मिले तो वे अपने परिवार और समाज के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।
श्री पांडुरंग आज माता मनसा देवी गौधाम में पंचकूला गौशाला ट्रस्ट की 13वीं तथा ‘कलाम एक्सप्रेस’ की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि सरकार और सामाजिक संस्थाओं की ओर से विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के शैक्षणिक एवं सामाजिक उत्थान के लिए ‘कलाम एक्सप्रेस’ सहित कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। हालांकि इस दिशा में संस्थागत स्तर पर और भी प्रयास करने की आवश्यकता है, ताकि ऐसे बच्चों के जीवन में शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास की रोशनी पहुंचाई जा सके। उन्होंने विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए अपनी और सरकार की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
पंचकूला में विशेष बच्चों के लिए सभी सुविधाओं से लैस संस्थान बनाया जाए
श्री पांडुरंग ने कहा कि पंचकूला में विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के लिए सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त एक ऐसा संस्थान विकसित किया जाना चाहिए, जहां देश और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा सके। ऐसा संस्थान बच्चों को बेहतर अवसर देने के साथ-साथ उनके अभिभावकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सहारा बन सकता है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ गौ माताओं की सेवा और सुरक्षा के लिए समर्पित पंचकूला गौशाला ट्रस्ट अपनी 13वीं वर्षगांठ मना रहा है, वहीं दूसरी तरफ विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के जीवन में शिक्षा, इलाज और आत्मविश्वास की रोशनी पहुंचाने वाली ‘कलाम एक्सप्रेस’ अपनी तीसरी वर्षगांठ पूरी कर रही है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता करुणा, पालन-पोषण और सह-अस्तित्व की प्रतीक रही हैं। गौ सेवा केवल गौ वंश की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस संवेदना को जीवित रखने का एक साधन है, जो हमें प्रत्येक जीव के प्रति दया और जिम्मेदारी की भावना सिखाती है। यह गर्व की बात है कि पंचकूला गौशाला ट्रस्ट पिछले 13 वर्षों से इसी भावना को अपने कार्यों के माध्यम से आगे बढ़ा रहा है।
बच्चों तक शिक्षा पहुंचा रही ‘कलाम एक्सप्रेस’