आज अष्टमी का पावन दिन है। मातारानी के व्रत के उपरांत के अष्टमी पर्व को लोग बड़ी श्रद्धा और उत्साह से मनाते हैं। इस दिन लोग कंजन पूजन करते हैं और उन्हें माता के रूप में पूजते है तथा प्रसाद आदि देकर उन्हें विदा करते हैं। इसके उपरान्त घरों रखी खेतरी जोकि उनके द्वारा नवरात्रों के प्रारम्भ बीजी जाती है, उसको बहते पानी में प्रवाहित करने का प्रावधान है। लेकिन शहर में बहते पानी का कोई स्त्रोत न होने के कारण लोग अपनी खेतरी को साथ लगते नौरंगराय तालाब में ही प्रवाहित कर देते हैं। लोग इस खेतरी के साथ कुछ पैसे भी तालाब में फैंकतें है जिसे निकालने के लिए गरीब घरों के छोटे-छोटे बच्चे जिन्हें तैरना भी नहीं आता। थरमोकोल के टुकड़े अपने शरीर के साथ बांध कर तालाब में कूदते हैं और उन पैसों को निकालने की कोशिश करते हैं। कमोवेश यही हाल शहर के अन्य तालाबों पर भी देखने को मिल रहा है। यदि यह थरमोकोल उनके शरीर से अलग हो जाए तो कोई बड़ा हादसा भी पेश आ सकता है। दूसरी ओर सरकार द्वारा स्वच्छता अभियान जोर शोर से चलाया जा रहा है जिसकी सरे आम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और तालाब को गंदा किया जा रहा है। शासन-प्रशासन को इस ओर समुचित ध्यान देना चाहिए।












