मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज भाजपा पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी द्वारा पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ और पंजाब का पानी हड़पने के लिए वोट मांगे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सूबे को उसके जायज अधिकारों से वंचित रखना और वित्तीय बकाया रोके रखना भाजपा की पुरानी आदत है।
साढ़े चार साल से पंजाब के आर.डी.एफ. (ग्रामीण विकास फंड) और वैट के बकाया रोकने के लिए मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने नशे के मुद्दे पर अकालियों और भाजपा पर भी तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन दोनों पार्टियों ने अपने पिछले शासनकाल के दौरान पंजाब को नुकसान पहुंचाया और अब चुनावों में लाभ कमाने के लिए मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि पंजाब अपने अधिकारों और हितों के साथ कोई समझौता बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष की बौखलाहट आम आदमी पार्टी को मिल रहे लगातार जनसमर्थन का नतीजा है।
मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “भाजपा, पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ और पंजाब का पानी छीनने की साजिश रचकर वोट मांग रही है। पंजाब को उसके जायज अधिकारों से वंचित करना भाजपा की पुरानी आदत बन चुकी है। पंजाब के लोगों ने देश के लिए अपार कुर्बानियां दी हैं, देश की खाद्य सुरक्षा में योगदान दिया है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए डटकर पहरा दे रहे हैं, फिर भी सूबे को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के हाथों बेइंसाफी का सामना करना पड़ रहा है।”
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया, “पंजाब कभी भी किसी राजनीतिक पार्टी को अपने हितों को नुकसान पहुंचाने या अपने लोगों के अधिकारों के साथ समझौता करने की इजाजत नहीं देगा। पंजाब यूनिवर्सिटी, पंजाब के इतिहास, पहचान और अकादमिक विरासत से जुड़ी अहम संस्था है, जबकि हमारे पानी के स्रोत हमारी कृषि अर्थव्यवस्था और लाखों किसानों की रोजी-रोटी के लिए अत्यंत जरूरी हैं। पंजाब के लोग सूबे की संस्थाओं, पानी या वित्तीय अधिकारों पर इसके अधिकारों को कमजोर करने की किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
पंजाब के बकाया वित्तीय फंडों के लिए मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मोदी सरकार ने पिछले साढ़े चार साल से पंजाब के आर.डी.एफ. और वैट के बकाया रोके हुए हैं। फंडों को इतने लंबे समय तक रोकना पंजाब के लोगों के साथ घोर अन्याय है और यह सूबे के जरूरी विकास और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के कामों को प्रभावित करता है। पंजाब अपने जायज अधिकारों के अलावा और कुछ नहीं मांग रहा और केंद्र सरकार को राज्य के प्रति अपनी वित्तीय जिम्मेदारियां पूरी करनी चाहिए।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब के लोग इंसाफ के हकदार हैं। हमारे सूबे को अपने जायज फंडों की मांग करने का पूरा अधिकार है और हम दबाव के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे। कोई भी सरकार पंजाब को उसके जायज संसाधनों से अनिश्चित समय के लिए वंचित नहीं रख सकती। पंजाब के विकास और इसके लोगों की भलाई को भाजपा के राजनीतिक समीकरणों की बलि नहीं चढ़ाया जा सकता।”
शिरोमणि अकाली दल और भाजपा पर नशे के मुद्दे पर तीखा हमला करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “अकालियों और भाजपा ने अपने शासनकाल के दौरान पूरे पंजाब में नशे का जाल बिछाया। अनगिनत परिवारों ने नशे के भावनात्मक और सामाजिक परिणाम भुगते हैं और हमारे नौजवानों ने इन पार्टियों की नाकामियों की भारी कीमत चुकाई है। पंजाब के लोग सूबे के सामाजिक ताने-बाने को पहुंचाए गए नुकसान को भूले नहीं हैं।”
उन्होंने दावा किया, “अकाली और भाजपा अब मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे उनकी राजनीतिक अवसरवादिता बेनकाब हो गई है। जो पार्टियां पिछले समय में पंजाब को संभालने में नाकाम रहीं, वे चुनावों का लाभ कमाने के लिए फिर हाथ मिलाकर अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकतीं। पंजाब को ईमानदार नेताओं, नशों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई और नौजवानों के भविष्य की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध सरकार की जरूरत है, न कि अवसरवादी राजनीतिक गठबंधनों की।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “लोग राजनीतिक पार्टियों का मूल्यांकन उनके पिछले रिकॉर्ड और पंजाब के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से करेंगे, उनके नारों से नहीं। जिन्होंने राज्य के हितों के साथ समझौता किया, वे राजनीतिक दलबदल करके अपनी पिछली नाकामियों को मिटा नहीं सकते। पंजाब का भविष्य ईमानदार शासन, जवाबदेही और लोगों की भलाई के लिए दृढ़ संकल्प पर खड़ा किया जाना चाहिए।”












