गोवर्धन मठ के शंकराचार्य निश्चलानंद स्वामी ने
कहा, ”मेरा हृदय ऐसा नहीं कि प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का निमंत्रण दें तो फूल जाऊं तो निमंत्रण ना दें तो कुपित हो जाऊं. राम जी शास्त्रों के हिसाब से प्रतिष्ठित हों, ये ज़रूरी है. अभी प्रतिष्ठा शास्त्रों के हिसाब से नहीं हो रही है, इसलिए मेरा उसमें जाना उचित नहीं है. आमंत्रण आया है कि एक व्यक्ति के साथ आ सकते हैं.”
निश्चलानंद स्वामी कहते हैं, ”कौन मूर्ति का स्पर्श करे कौन ना करे, इसका ध्यान रखना चाहिए. पुराणों में लिखा है कि देवता (मूर्ति) तब प्रतिष्ठित होते हैं, जब विधिवत हों. अगर ये ढंग से ना किया जाए तो देवी देवता क्रोधित हो जाते हैं. ये खिलवाड़ नहीं है. ढंग से किया जाए तभी देवता का तेज सबके लिए अच्छा रहता है वरना विस्फोटक हो जाता है.”पीएम मोदी के प्राण प्रतिष्ठा किए जाने पर वो कहते हैं, ”अगर दो साल बाद भी प्रतिष्ठा मोदी जी ही करते तो मैं प्रश्न उठाता कि मूर्ति की प्रतिष्ठा ढंग से होनी चाहिए. अभी अयोध्या में शास्त्रों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है. और कोई कारण नहीं है. मैं किसी पार्टी का नहीं हूं. मैं नाराज होता ही नहीं हूं.’
बयान में कहा गया है कि हम चाहते हैं कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह वेद, शास्त्र, धर्म की मर्यादा का पालन करते हुए हो.













