प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात की। संक्षिप्त बैठक के दौरान मोदी ने सीमा मुद्दों के समाधान में हो रही देरी पर चिंता जताई। विदेश सचिव विनय क्वात्रा के मुताबिक, ‘पीएम ने रेखांकित किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखना और एलएसी का सम्मान करना भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने के लिए आवश्यक है।’ इस संबंध में दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि वे अपने संबंधित अधिकारियों को मामले के शीघ्र निपटान एवं तनाव कम करने की दिशा में उचित प्रयास करने का निर्देश देंगे।
ब्रिक्स सम्मेलन के संबंधित वीडियो में पहले पीएम मोदी और शी जिनपिंग को हाथ मिलाते हुए दिखाया गया था। इसके बाद दोनों के बीच एक संक्षिप्त बातचीत हुई। फिर वे अपनी निर्धारित सीटों पर चले गए। भारत ने अपने सीमा मतभेदों को सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री के जोहानिसबर्ग रवाना होने से पहले कमांडर स्तर की वार्ता और उसके बाद तीन दिनों तक मेजर-जनरल स्तर की बैठकें आयोजित करके पूर्वी लद्दाख में सीमावर्ती क्षेत्रों में मामले को हल करने की कोशिश की थी।
गौर हो कि दोनों नेताओं ने पिछले साल जी20 बाली शिखर सम्मेलन में एक-दूसरे से मुलाकात की थी, इसके बारे में कहा गया था कि पीएम मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की आवश्यकता पर बल दिया था। भारत और चीन दोनों के बीच पिछले तीन वर्षों से गतिरोध की स्थिति है। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में चौतरफा गिरावट आई है। एलएसी विवाद को सुलझाने की दिशा में दोनों देशों के बीच अब तक 19 दौर की वार्ता हो चुकी है।
ब्रिक्स से जुड़े 6 नये सदस्य
ब्रिक्स समूह में अर्जेंटीना, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को भी शामिल किया गया है। इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि समूह का आधुनिकीकरण और विस्तार यह संदेश है कि सभी वैश्विक संस्थानों को बदलते दौर में खुद को बदलने की जरूरत है। नये सदस्यों को पांच देशों के इस समूह में शामिल करने की घोषणा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा के साथ एक संयुक्त मीडिया ब्रीफिंग में की।













