नई दिल्ली: प्रतिद्वंद्वी टीमों को लगातार रौंदने से विराट कोहली की महानता में इस वर्ष तेजी से बढ़ौतरी हुई जबकि भारतीय महिला टीम को भी अपने शानदार विश्व कप अभियान की बदौलत अंतत: ‘क्रिकेट को लेकर जुनूनी’ देश से प्यार और सम्मान मिला। ‘किंग कोहली’ लगातार 9 सीरीज जीतने के बाद अब अगले 18 महीनों में मिलने वाली चुनौती के लिए तैयार हैं जबकि पिछले 6 महीनों में मिताली राज महिला क्रिकेट टीम की कप्तान से अब एक ब्रांड बन गई हैं। भारतीय महिला टीम भले ही मेजबान इंग्लैंड से विश्व कप के रोमांचक फाइनल में हार गई हों, लेकिन इस प्रदर्शन की बदौलत उन्हें देश में लोगों का प्यार और वित्तीय प्रोत्साहन मिला जिससे महिला टीम कुछ समय के लिए देश में सुर्खियों में रहीं। वहीं प्रतिद्वंद्वी टीमों के लिए भारतीय पुरूष टीम के बेहतरीन सफर को रोकना नामुमकिन रहा। हालांकि भारतीय टीम ने अपने ज्यादातर मैच घरेलू मैदान पर ही खेले लेकिन लगातार नौंवी टेस्ट सीरीज जीतना और लगातार 8 वनडे सीरीज अपने नाम करना कोई उपलब्धि से कम नहीं। कोहली और उनकी टीम को हालांकि कुछ मौकों पर परीक्षा से भी गुजरना पड़ा जैसे अॉस्ट्रेलिया के खिलाफ पुणे टेस्ट में मिली हार या ईडन गार्डंस में श्रीलंका के खिलाफ तेज गेंदबाजों के मुफीद पिच पर पहली पारी में सिमटना मुश्किल मौके रहे। लेकिन ऐसा एकाध बार ही हुआ। इस इतने शानदार वर्ष में सबसे निराशाजनक प्रदर्शन चैम्पियंस ट्रॉफी का फाइनल रहा जिसमें उसे पाकिस्तान से हार का मुंह देखना पड़ा जबकि भारतीय टीम इसमें गत चैम्पियन के तौर पर खेल रही थी। लेकिन इस हार के बाद जो विवाद भारतीय टीम से जुड़ा, वह भारतीय क्रिकेट इतिहास के भुलाने वाले अध्याय में शामिल हो गया। कोहली और कोच अनिल कुंबले के बीच बढ़ता विवाद खुले में आ गया जिसके बाद कुंबले को एक साल के सफल कार्यकाल के बाद इस्तीफा देने के लिए बाध्य होना पड़ा। इस पूरे प्रकरण से हालांकि इस बार की फिर से पुष्टि हो गई कि भारतीय टीम में केवल एक ही ‘बॉस’ है और वो कप्तान है।













