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सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र निर्माण करनेवाली वैदिक शिक्षापद्धति – Ozi News
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सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र निर्माण करनेवाली वैदिक शिक्षापद्धति

admin by admin
June 8, 2022
in BREAKING, CHANDIGARH, COVER STORY, Education, HARYANA, Himachal, INDIA, PUNJAB, RAJASTHAN, WORLD
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ਤੈਅ ਤਾਰੀਖ 5 ਅਗਸਤ ਨੂੰ ਹੀ ਰਖਿਆ ਜਾਵੇਗਾ ਸ਼੍ਰੀ ਰਾਮ ਜਨਮ ਭੂਮੀ ਦਾ ਨੀਂਹ ਪੱਥਰ   :  ਜਗਦਗੁਰੁ ਪੰਚਾਨੰਦ ਗਿਿਰ

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? सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र निर्माण करनेवाली वैदिक शिक्षापद्धति- गुरूकुल व उनकी आज के अत्याधुनिक युग में आवश्यकता।

➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

? भारतवर्ष की गुरुकुल शिक्षा की पृष्ठभूमि में वेद ही हैं। वेदों द्वारा हमें भारतीय संस्कृति, सभ्यता, जीवन और दर्शन का ज्ञान होता है। वेद हमारी वह थाती हैं, जो मानव जीवन के आरंभ से अंतिम लक्ष्य को अपने में संजोये हुए हैं।

? वैदिक समय की गुरुकुल शिक्षा का स्वरूप आदर्शवादी था। मानव का मुख्य उद्देश्य आत्म-ज्ञान अथवा ब्रह्म-ज्ञान की प्राप्ति होना, उत्तम चरित्र का निर्माण, सभ्यता एवं संस्कृति का संरक्षण, व्यावसायिक दक्षता का विकास, दायित्वों के निर्वाह की क्षमता, ज्ञान एवं अनुभव पर बल, चित्तवृत्तियों का निरोध और ईश्वर भक्ति एवं धार्मिकता यह मानव जीवन का उद्देश्य था।

? जन्म से 7 साल तक मूलाधार केन्द्र, जो शरीर की नींव है, वह विकसित होता है । 7 से 14 साल की उम्र तक स्वाधिष्ठान केन्द्र विकसित होता है तथा 14 से 21 साल तक मणिपुर केन्द्र का विकास होता है, यह बुद्धि को विकसित करने के लिए स्वर्णकाल है । यह भावनाओं को दिव्य व सफल बनाने के लिए सटीक समय है । 24 वर्ष की अवस्था तक गुरूकुल में अध्ययन व ब्रह्मचर्य पालन अनिवार्य होता था।

? गुरूकुल शिक्षण के कारण ही भारतवर्ष सर्वगुणसम्पन्न: राष्ट्र था। विश्वगुरू व सोने की चिड़िया के नाम की उपाधि दी गई थी।

? भारत के गुरूकुलों में जो विद्या पढाई जाती थीं, वे इस प्रकार हैं-

(१.) अग्नि विद्या ( Metallurgy )
(२.) वायु विद्या ( Flight )
(३.) जल विद्या ( Navigation )
(४.) अंतरिक्ष विद्या ( Space science)
(५.) पृथ्वी विद्या ( Environment )
8(६.) सूर्य विद्या ( Solar study )*
(७.) चन्द्र व लोक विद्या ( Lunar study )
(८.) मेघ विद्या (Weather forecast)
(९.) पदार्थ विद्युत विद्या ( Battery )
(१०.) सौर ऊर्जा विद्या ( Solar energy )
(११.) दिन रात्रि विद्या (unknown)
(१२.) सृष्टि विद्या (Space research)
(१३.) खगोल विद्या ( Astronomy)
(१४.) भूगोल विद्या (Geography )
(१५.) काल विद्या ( Time & Dimensions)
(१६.) भूगर्भ विद्या (Geology and Mining )
(१७.) रत्न व धातु विद्या ( Gems and Metals )
(१८.) गुरूत्वाकर्षण विद्या ( Gravity )
(१९.) प्रकाश विद्या (Light energy)
(२०.) तार विद्या (Communication)
(२१.) विमान विद्या (Plane)
(२२.) जलयान विद्या (Water Vessels)
(२३.) अग्नेय अस्त्र विद्या ( Arms and Ammunition )
(२४.) जीव जंतु विज्ञान विद्या ( Zoology, Botany )
(२५.) यज्ञ विद्या (Material science)

? यह तो बात हुई वैज्ञानिक विद्याओं की अब बात करते है चिकित्सा विद्याओं की –
आयुर्वेद चिकित्सा, योग शल्य चिकित्सा(Surgery), प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy), घरेलु चिकित्सा (Homeopathy), जल चिकित्सा, संगीत चिकित्सा, प्लास्टिक सर्जरी।

? यह तो बात हुई चिकित्सा विद्याओं की अब बात करते है धार्मिक और आध्यात्मिक विद्याओं की –

चार वेद, उपनिषद, स्मृति, गीता, रामायण, महाभारत, ईश्वरनिष्ठ महापुरुषों के चरित्र व दृष्टांत के बारे में शिक्षित किया जाता था।

?यह तो बात हुई धार्मिक और आध्यात्मिक विद्याओं की अब बात करते हैं….व्यावसायिक और तकनीकी विद्या की ?

?वाणिज्य (Commerce)
?कृषि (Agriculture)
?पशुपालन (Animal husbandry)
?पक्षीपालन (Bird keeping)
?पशु प्रशिक्षण (Animal training)
?यान यन्त्रकार ( Mechanics)
?रथकार (Vehicle designing)
?रत्नकार ( gems )
?सुवर्णकार ( Jewellery Designing )
?वस्त्रकार ( Textile)
?कुम्भकार ( Pottery)
?तक्षक
?रंगसाज (Dying)
?खटवाकर
?रज्जुकर (Logistics)
?वास्तुकार (Architect)
?पाकविद्या (Cooking)
?सारथ्य (Driving)
?नदी प्रबन्धक (Water management)
?सूचिकार (Data entry)
?गौशाला प्रबन्धक (Animal husbandry)
?उद्यान पाल (Horticulture)
?वन पाल (Horticulture)
?नापित (Paramedical)

? यह तो बात हुई व्यावसायिक और तकनीकी विद्या की अब बात करते हैं युद्ध कला विद्याओं की –

तलवार चलाना, बाण-तीर चलाना, भाला चलाना, घुड़सवारी करना।

नोट-विद्यार्थी अपनी रक्षा स्वयं कर सके इसलिए उसे सारी युद्ध कला की विद्यायें सिखाई जाती थीं।

? यह सब विद्या गुरुकुलों में सिखायी जाती थी पर अंग्रेजों ने आते ही 7 लाख 32 हजार गुरुकुलों को नष्ट कर दिया था। इस कारण अधिकांश विद्याएँ विलुप्त हो गयीं और भारतवर्ष का अधः पतन हुआ। जबरन लागू की गयी
मैकाले पद्धति ( काॅन्वेंट शिक्षा) से हमारे देश के युवाओं का भविष्य नष्ट हो रहा तब ऐसे समय में गुरुकुल के पुनः उद्धार की अत्यंत आवश्यकता अनुभव हुई।

? गुरुकुल शिक्षा-पद्धति से जो विद्यार्थी पढ़ते-लिखते थे उनमें तेजस्विता आती थी। क्योंकि हमारे शरीर में सात केन्द्र (चक्र) हैं – मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्धाख्य, आज्ञा और सहस्रार; इन केन्द्रों के विकास करने की पद्धति गुरु लोग जानते थे । गुरु का अर्थ है कि जो हमें लघु सुखों, लघु वासनाओं, लघु मान्यताओं से ऊपर उठा दें। इसलिए पहले दीक्षा दी जाती थी। जीवन को सही दिशा देने के लिए दीक्षा बहुत आवश्यक है।

? मैकाले शिक्षा- पद्धति से पढ़े हुए मानवीय संवेदनाओं से वंचित विद्यार्थी बेचारे कई लाखों रुपये रिश्वत दे के नौकरी लेते हैं और करोड़ों रुपये शोषित करके सुखी होने में लगते हैं। न वे सुखी, न जिनको शोषित किया वे सुखी, न जिनको रिश्वत देते हैं वे सुखी, न उनके सम्पर्क में आनेवाले सुखी ! तो चारों तरफ शोषण-ही-शोषण और दुःख-ही-दुःख बढ़ गया।

? भारतीय संस्कृति के मूल्यों पर आधारित शिक्षण पद्धति की आवश्यकता को ध्यान में रखकर आधुनिक शिक्षा और वैदिक ज्ञान के सुंदर समन्वय से युक्त शिक्षण प्रणाली से सज्जित संत श्री आशारामजी गुरुकुलों की स्थापना की गई है।

?संत श्री आशारामजी गुरुकुलों में शिक्षा व दीक्षा के आधार पर ही मनुष्य के जीवन का निर्माण होता है। शिक्षा दीक्षा सुखी, स्वस्थ व सम्मानित जीवन जीने तथा जीवन के परम लक्ष्य परमात्मप्राप्ति का बोध करानेवाली, परम लाभदायक सिद्ध हो रही है।

? संत श्री आशारामजी गुरूकुलों में शिक्षा के साथ अन्य प्रवृत्तियां भी करायीं जाती हैं। विभिन्न विषयों पर रचनात्मक प्रवृत्तियों का आयोजन, खेलकूद स्पर्धाओं का आयोजन, पारिवारिक एवं सामाजिक रिश्तों के प्रति जागरूकता के संस्कार सृजन हेतु मातृ-पितृ पूजन दिवस आदि भव्य सांस्कृतिक आयोजन, विशेष आध्यात्मिक ज्ञान स्पर्धा एवं दिव्य प्रेरणा प्रकाश स्पर्धा आदि, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान गणित प्रदर्शनी, विद्यालय तहसील जिला एवं राज्य स्तरीय वक्तृत्व, संगीत, प्रश्नोत्तरी, रंगोली, चित्रकला आदि स्पर्धाओं का आयोजन किया जाता है। समय-समय पर भारतीय संस्कृति के त्योहारों और पर्वों का आयोजन भी कराया जाता है।

? आज हम सभी संकल्प लेते हैं कि हम सभी हिन्दू अपने बच्चों को मतांतरण करानेवाले, अश्रद्धा बोने वाले, हिन्दू धर्म के द्वेषी बनानेवाले विधर्मी काॅन्वेंट स्कूलों में न भेजकर, गुरूकुल शिक्षण दिलवायेंगे।

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