रजिस्ट्री करवाना ऐसा हुआ जैसे तोप का लाइसेंस लेना हो।
गलत नियमो के कारण भूमि की खरीद-फरोख्त के लिए भटकती जनता।
तुगलकी फरमानों के लिए मशहूर गठबंधन सरकार के कृषि भूमि की रजिस्ट्री या किसी भी तरफ के हस्तांतरण पर एनडीसी लागू करने के तुगलकी फरमान को निंदनीय करार देते हुए इनैलो प्रदेश प्रवक्ता ओंकार सिंह ने कहाकि हरियाणा की गठबंधन सरकार ने भूमि या भवन की रजिस्ट्री करवाने को ऐसा कर दिया था कि जैसे तोप का लाइसेंस लेना हो। अब नए फरमान अनुसार कृषि भूमि के भी किसी भी प्रकार के लेन-देन, खरीद फरोख्त, रजिस्ट्री, परिवारिक हस्तांतरण के लिए भी सम्बंधित नगरनिक़ाय से एनओसी लेना अनिवार्य होगा। यह निर्णय किसानों को अधिक प्रभावित करेगा। पहले ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया इतनी जटिल हो चुकी है कि आम व्यक्ति बिना भ्र्ष्टाचार के चरणों से गुजरे या दलालों की सहायता के रजिस्ट्री करवा ही नही सकता। गांव शाहपुर की 10 एकड़ से अधिक के पारिवारिक हस्तांतरण करवाने तेहसील्ड पहुंचने पर तहसीलदार ने बताया कि इसके लिए नगरपरिषद से एनओसी लेनी आवश्यक है। इस बारे जब कार्यकारी अधिकारी नगरपरिषद से मुलाकात करके बात की गई उन्होंने ऐसे किसी भी प्रावधान से अनभिज्ञता बताई और बिल्डिंग इंस्पेक्टर को इस बारे स्थानीय निकाय विभाग से स्पष्टीकरण लेने की बात कहके कुछ दिन का समय मांगा। कितनी आश्चर्यजनक बात है कि गठबंधन सरकार के तुगलकी फरमानों का स्वयं सम्बंधित अधिकारियों को भी पता नही। यहां यह वर्णन करना भी जरूरी है कि एक एकड़ या एक एकड़ से अधिक कृषि भूमि की रजिस्ट्री के लिए जिला नगर योजनाकार को एनओसी लेना भी अनिवार्य नही है तो फिर यह नियम क्यो बनाया गया जबकि भारत कृषि प्रधान देश है और यहां कृषि आय भी करमुक्त है। उन्होंने मुख्यमंत्री महोदय से मांग की कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया को सरल, स्पष्ट व अविलम्भ बनाया जाए ताकि जनता को राहत मिल सके। उन्होंने अम्बाला छावनी की जनता से आग्रह किया कि तुगलकी फरमानों वाली सरकार को चलता करके इनैलो की सरकार बनाए ताकि जनता के हक के नियम व कानून बनाकर जनता को राहत पहुंचाई जा सके।
