छिंदवाड़ा(भगवानदीन साहू) धार्मिक एवं समाजिक संगठनों ने महामहिम राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री एवं मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया कि 25 अप्रैल 2018 को जोधपुर जेल में संत श्री आशारामजी बापू के विरुद्ध जो फैसला सुनाया गया वह विधि सिध्दांतों के विरुद्ध करोड़ो – करोड़ों लोगों के जनभावनाओं के विपरीत है । आई.पी.सी. की धारा 370 ( 4 ) नाबालिक की तस्करी दण्ड 10 वर्ष कठोर कारावास ! इसमें आशाराम बापू के साथ सहआरोपी बनाए गए शरदचंद्र पोटाला एवं शिल्पी गुप्ता पर आरोप है कि इन्होंने लडकी को बापूजी के पास भिजवाया । जबकि वास्तविक्ता यह है कि आरोप लगाने वाली लड़की के पिता ने गुरुकुल के प्राचार्य को लिखित रूप से छुट्टी का प्रार्थना पत्र देकर अपनी लड़की को अपने साथ शाहजहाँपुर ले गये । वहाँ से दिल्ली , जोधपुर गये लड़की स्वयं के माता – पिता के साथ गई। फिर किस आधार पर नाबालिक तस्करी का अरोप सिध्द किया गया है !? आईपीसी की धारा 376 ( 2 ) , 376 ( डी ) सजा उम्र कैद जिसमें न्यायालय ने दुष्कर्म करना पाया । जबकि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार दुष्कर्म की कोई पुष्टी नहीं हुई । तथा एफ.आई.आर. में भी दुष्कर्म का जिक्र तक नहीं है । तथाकथित घटना के समय उक्त लड़की मोबाइल पर संदिग्ध व्यक्ति के साथ 1 घंटा व्यस्त थी तथा पूज्य बापूजी तथाकथित घटना के समय वहाँ थे ही नहीं । इस प्रकरण में दो अन्य आरोपी शिवा एवं प्रकाश को न्यायालय ने बाईज्जत बरी किया ! इन पर आरोप था कि लड़की को इन लोगों ने बापूजी के पास भिजवाया। यहाँ न्यायालय ने माना कि शिवा , प्रकाश जोधपुर में थे ही नहीं । ऐसे हजारों गवाह बचाव पक्ष के न्यायालय में नहीं देखा । 25 अप्रैल 2018 को जब यह फैसला सुनाया जाना था उसके पूर्व ही विदेशों से आर्थिक सहायता प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक मिडिया को कैसे पता चला कि आशाराम बापू को दस वर्ष या उम्रकैद की सजा हो सकती है ? वहीं केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने राजस्थान , हरियाणा , गुजरात में हाई अलर्ट क्यों घोषित किया ?? निचली अदालत की गलती ठीक करने के लिए उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय तक गत 4.5 वर्षों से चक्कर लगाया जा रहा है पर सिर्फ तारीख के अलावा कुछ नहीं मिला । पूरे प्रकरण में न्यायपालिका की छवि खराब हो रही है । पूरे देश से पूज्य बापूजी की रिहाई के लिए राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री तक लाखों आवेदन पत्र गये ; जो कार्यवाही हेतु राजस्थान प्रशासन को भेज गए । परंतु कार्यवाही कुछ नहीं हुई ! क्या महामहिम राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री एवं करोडो – करोड़ो लोगों की जनभावना एवं सच्चाई से भी ऊपर न्यायपालिका है !? आवश्यक कार्यवाही की मांग की। ज्ञापन देते समय शिक्षाविद विशाल चवुत्रे , आधुनिक चिंतक हरशुल रघुवंशी , कुनबी समाज के युवा नेता अंकित ठाकरे , राष्ट्रीय बजरंग दल के नितेश साहू , पवार समाज के प्रमुख हेमराज पटले , कलार समाज के प्रतिष्ठित सुजीत सूर्यवंशी , साहू समाज के ओमप्रकाश साहू , अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू सभा के विलास घोंघे , सुभाष इंग्ले , युवा सेवा संघ के नितिन दोईफोड़े , ओमप्रकाश डहेरिया , आई. टी. सेल के प्रभारी भूपेश पहाड़े , M. R. पराड़कर , नारी रक्षा मंच से दर्शना खट्टर , सुमन दोईफोड़े , विमल शेरके , डॉ. मीरा पराडकर , छाया सूर्यवंशी , करुणेश पाल , शकुंतला कराडे , योगिता पराडकर , निर्मिला पटेल , कौशल्या कुशवाहा , वनिता सनोडिया , आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

