नई दिल्ली (प्रेस की ताकत न्यूज डेस्क): भारत की ओर से 59 चीनी ऐप को बैन किया गया है और इसके बाद अब चीन की ओर से साइबर अटैक किए जाने की आशंका है। इसे देखते हुए देश में अलर्ट के अलावा इंटेलिजेंस ने मॉनिटरिंग तेज कर दी है। साइबर सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट्स का मानते हैं कि ऐप्स को बैन करना केवल एक शुरुआत है और इससे भड़का चीन बदले में इंडिया के साइबर स्पेस को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा।
जिस कारण भारत सभी सेक्टरों में पहले से बेहतर मॉनिटरिंग कर रहा है। इसके अलावा पावर, टेलिकॉम और फाइनेंशल सर्विसेज से जुड़े सेक्टर्स का चाइनीज इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ाव होने के चलते उन्हें भी अलर्ट पर रखा गया है। सुत्रों का मानना है कि कई साल से हमने चीन को क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की अनुमति दे रखी थी, ऐसे में उन नेटवर्क्स तक चीन की पहुंच बहुत ही आसान है। इनमें कम्युनिकेशंस, पावर के अलावा फाइनेंशल सेक्टर भी शामिल है। जो अब बहुत बड़ा खतरा सिद्ध हो सकते हैं।
यही नहीं रिमोट लोकेशंस से चीन भारत के इन नेटवर्क्स पर साइबर अटैक कर सकता है, इसे लेकर विभागों को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। साइबर सिक्यॉरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सरकार उन कंपनियों पर फोकस करेगी जिनमें चाइनीज इन्वेस्टर्स की ओर से फंडिंग की गई है और इनकी मॉनिटरिंग और सर्विलांस किया जा रहा है। इसके अलावा सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में इस्तेमाल किए जा रहे चीन में बने सर्विलांस डिवाइस भी रडार पर हैं।
चाहे मौजूदा इकनॉमिक सिचुएशन में कोई भी सीमा पर युद्ध के लिए तैयार नहीं है, ऐसे में साइबर स्पेस, ट्रेड और सप्लाई चेन को प्रभावित कर नुकसान पहुंचाने की कोशिश जरूर की जा सकती है। चीन की ओर से फंडिंग पाने वाली कंपनियों और खासकर टेक फर्म्स की अब निगरानी की जा रही है क्योंकि इन्हें आसानी से निशाना बनाया जा सकता है।
पहले भी चाइनीज हैकर्स से जुड़ी वॉर्निंग्स सरकार की ओर से दी जा चुकी है। चीन की ओर से पहले भी डेटा माइनिंग के लिए अटैक किए जाते रहे हैं और पिछले साल लाखों भारतीयों का मेडिकल डेटा चोरी होने का मामला सामने आया था।
