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क्या पसमांदा सम्मेलनों का होगा लोकसभा चुनाव में असर, मुसलमान बनेंगे बीजेपी के वोटर ?

admin by admin
July 22, 2023
in BREAKING, INDIA
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भाजपा द्वारा संगरूर लोकसभा उपचुनाव के लिए केवल ढिल्लों प्रत्याक्षी घोषित
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2024 के लोकसभा चुनाव में क्या मुसलमान समान नागरिक संहिता लागू करने की घोषणा करने वाली बीजेपी को वोट देंगे? भाजपा पिछले एक साल से पसमांदा

समान नागरिक संहिता को लेकर मुसलमानों के बीच गलफत दूर करने के लिए भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में पहला सम्मेलन रविवार को लखनऊ में करेगी। इस सम्मेलन में पसमांदा मुसलमान शामिल होंगे। कार्यक्रम के आयोजक राष्ट्रवादी मुस्लिम पसमांदा महाज़ (आरएमपीएम) है, जो बीजेपी समर्थित संगठन है। इस मीटिंग में यूपी सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी, यूपी अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अशफाक सैफी समेत कई नेता मुस्लिम नेता शामिल होंगे। इसके अलावा 27 जुलाई से भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में पसमांदा स्नेह यात्रा शुरू करने वाली है। यूपी के गाजियाबाद से शुरू होने वाली स्नेह यात्रा यूपी के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों के अलावा देश के अन्य राज्यों से भी गुजरेगी।

नए पसमांदा चेहरों को दिया है मौका

पिछले एक साल से बीजेपी पसमांदा बिरादरी में घुसपैठ के लिए कार्यक्रम कर ही है। कुछ दिनों पहले लखनऊ में जम्मू-कश्मीर से राज्यसभा के लिए नॉमिनेट होने वाले गुलाम अली खटाना बीजेपी के लिए प्रचार करने आए थे। खटाना राज्यसभा के लिए चुने जाने वाले पहले गुर्जर मुस्लिम हैं और बीजेपी को आउटरीच प्रोग्राम के पोस्टर बॉय है। इसके अलावा बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा पिछले 10 मार्च से पसमांदा मुसलमानों के बीच कार्यक्रम कर रहा है, जिसमें बीजेपी की मुस्लिमों से जुड़ी पॉलिसी के बारे में बताया जा रहा है। पसमांदा बुद्धिजीवी सम्मेलन में यूपी के दिग्गज नेता शिरकत कर रहे हैं। पिछले एक साल के दौरान मदरसों में नरेंद्र मोदी के मन की बात को उर्दू में अनुवाद कर किताब के तौर बांटे गए हैं। पार्टी ने इस वोट बैंक को कितनी संजीदगी से लिया है, यह जानने के लिए पिछले दिनों हुए यूपी में निकाय चुनाव का रुख करें।

यूपी निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 391 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था। बीजेपी के इतिहास में पहली बार ऐसा प्रयोग किया गया, जो एक हद तक सफल रहा। निकाय चुनाव में बीजेपी के 61 मुस्लिम कैंडिडेट यूपी में जीत गए। चेयरमैन की 5 सीटों पर बीजेपी के मुस्लिम कैंडिडेट ने जीत हासिल की। बीजेपी के स्थानीय नेतृत्व में पसमांदा मुसलमानों को शामिल किया गया है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुके तारिक मंसूर अब भाजपा के कोटे से विधान परिषद के सदस्य हैं। योगी सरकार के एकमात्र मुस्लिम मंत्री दानिश आजाद अंसारी को भी पसमांदा होने का फायदा मिला।

पसमांदा को आरक्षण मिलेगा क्या ?
उत्तरप्रदेश में करीब चार करोड़ मुसलमान हैं। आंकड़े बताते हैं कि देश के कुल मुसलमानों की आबादी में 80-85 प्रतिशत पसमांदा मुसलमान हैं। इस लिहाज से उत्तरप्रदेश में पसमांदा समाज की आबादी करीब तीन करोड़ है। मुसलमानों में सैफी, अंसारी, अल्वी, कुरैशी, मंसूरी, इदरीसी, सलमानी, रायन समुदाय के लोग पसमांदा की कैटिगरी में आते हैं। पसमांदा समाज के लोग पारंपरिक तौर से दर्जी, धोबी, नाई, कसाई, मेहतर, धुनिया और जुलाहे काम करते रहे हैं। मुस्लिम मजहब में सैद्धांतिक तौर से जाति प्रथा नहीं है, मगर भारत में मुसलमान अंदरुनी तौर पर तीन हिस्सों में बंटे हैं। यह बंटवारा हिंदू धर्म जैसा ही है। सवर्ण कैटिगरी के मुस्लिम अशराफ हैं। अजलाफ को ओबीसी और अरजाल को दलित माना जा सकता है। पसमांदा मुसलमान राजनीतिक और प्रशासनिक तौर से ओबीसी कैटिगरी में रहना चाहते हैं। पसमांदा दशकों से नौकरी और सरकारी सिस्टम में ओबीसी आरक्षण का लाभ देने की वकालत करते हैं। राजनीतिक दलों ने उनकी इसी मंशा को भांप लिया है और बीजेपी ने अब पसमांदा को राजनीतिक तौर से लुभाने की तैयारी कर ली है।

बीजेपी ने पुरानी रणनीति को मुसलमानों पर आजमाया
दरअसल भारतीय जनता पार्टी ने पिछले एक दशक में नए वोटरों से जुड़ने की अलग रणनीति बनाई है। यूपी में बीजेपी में गैर जाटव दलितों के बीच पैठ बनाई, क्योंकि जाटव बिरादरी लंबे समय से बहुजन समाज पार्टी से जुड़ी है। बिहार में भी गैर यादव ओबीसी नेतृत्व को मौका दिया। लालू प्रसाद यादव के बिहार में यादव वोटरों पर एकछत्र प्रभाव है। महाराष्ट्र में भी भारतीय जनता पार्टी ने गैर मराठा नेताओं में रुचि दिखाई। हरियाणा में गैर जाट नेताओं को आगे बढ़ाया। इसी कड़ी में बीजेपी ने मुस्लिम वोटरों तक पहुंचने के लिए पसमांदा को चुना। 90 के दशक में पसमांदा आंदोलन शुरू होने के बाद भी मुसलमानों का नेतृत्व शेख, पठान जैसे अशराफ कैटिगरी के नेताओं के पास रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने पसमांदा नेताओं पर जो दांव खेला है, उसका फायदा यूपी के 20 लोकसभा क्षेत्र में मिल सकता है, जो अभी तक बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के लिए वोट करते रहे हैं। इसके अलावा बिहार के सीमांचल, झारखंड, असम और मध्यप्रदेश में भी पसमांदा कार्ड का असर दिख सकता है।

क्या बदलेगी एंटी मुस्लिम की छवि ?
आंकड़ों के मुताबिक इन पांच राज्यों में करीब 190 लोकसभा सीट पर पसमांदा वोटर हैं। अगर बीजेपी उनका दो प्रतिशत वोट भी हासिल कर लेती है तो वह कांग्रेस समेत विरोधियों के खाते से कई सीटें उड़ा लेगी। बीजपी के लिए चुनौती है कि पसमांदा समाज के अली अनवर समेत कई नेता कॉमन सिविल कोड, तीन तलाक और अल्पसंख्यकों की हत्या के मुद्दे पर वोटरों को आगाह कर रहे हैं। बीजेपी की छवि अभी तक एंटी मुस्लिम की है, 2024 तक पसमांदा की धारणा बदलेगी, इसका टेस्ट मध्यप्रदेश विधानसभा में हो जाएगा।

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