नई दिल्ली 8 दिसंबर, 2025
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के प्रधान श्री हरमीत सिंह कालका ने आज एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस को संबोधित करते हुए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 स्वरूपों की गुमशुदगी को लेकर सिख समुदाय में बढ़ रही गहरी निराशा और चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि यह पूरे पंथ से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मुद्दा है, जिसके बारे में पिछले पांच वर्षों से लगातार चर्चा और विरोध प्रदर्शन जारी हैं, लेकिन श्रोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति श्री अमृतसर द्वारा न तो कोई स्पष्ट पत्र जारी किया गया और न ही अभिलेखों में इसकी पुष्टि संबंधी कोई ठोस जानकारी दी गई।
कालका ने स्पष्ट कहा कि उन वर्षों के दौरान स्वरूपों की चोरी और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाएँ भी सामने आईं, फिर भी इस मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए एसजीपीसी द्वारा कोई गंभीर और आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।
उन्होंने बताया कि कई धार्मिक और किसान संगठन, जो गैर-राजनीतिक रूप से इस मुद्दे के लिए पिछले चार वर्षों से संघर्ष कर रहे थे, उनकी मांग के आधार पर कल पंजाब सरकार द्वारा इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है।
एफआईआर में वे कर्मचारी और संबंधित अधिकारी नामज़द हैं जो उस समय श्रोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति में ज़िम्मेदार पदों पर तैनात थे।
कालका ने आगे कहा कि “दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति का मानना है कि अब एसजीपीसी के प्रधान को नैतिक ज़िम्मेदारी समझते हुए जांच एजेंसी को पूरा सहयोग देना चाहिए, ताकि दोषियों पर कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई हो सके।”
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि यह मामला एक ‘क्लरिकल गलती’ था, तो फिर पाँच वर्षों तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? धार्मिक गंभीरता और पंथ सम्मान से जुड़े मामलों में लापरवाही और ढिलाई अस्वीकार्य है।”
कालका ने पंजाब विधानसभा के स्पीकर श्री कुलतार सिंह संधवां द्वारा एफआईआर दर्ज करवाने के कदम को ‘सराहनीय कदम’ बताया और आशा जताई कि पंजाब सरकार ईमानदारी से जांच को आगे बढ़ाएगी और दोषियों को उचित सज़ा मिलेगी।













