चंडीगढ़, 12 फरवरी- हरियाणा के विकास एवं पंचायत मंत्री श्री कृष्ण लाल पंवार ने कहा कि संत शिरोमणी श्री गुरू रविदास जी ने मानव धर्म को सबसे बड़ा धर्म बताया है। हमें उनसे प्रेरणा लेते हुए जाति-पाति का भेदभाव नहीं करना चाहिए और कमजोर वर्ग के उत्थान को ही अपना धर्म समझना चाहिए।
विकास एवं पंचायत मंत्री आज इसराना (पानीपत) विधानसभा के कवी गांव में संत रविदास जी की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां पहुंचकर उन्होंने संत रविदास जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और प्रदेशवासियों को बधाई दी।
इस मौके पर मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने संबोधित करते हुए कहा कि संत रविदास जी ने अपनी वाणी में कहा कि समाज ठीक रास्ते पर आगे बढ़े, इसके लिए जरूरी है कि समाज संगठित हो और समाज में भेदभाव न हो। सभी माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षित करें और संस्कारवान बनाएं तभी समाज आगे बढ़ेगा। हर गरीब व्यक्ति को शिक्षित बनाने में सहयोग करना चाहिए यही बाबा भीम राव अम्बेडकर व संत शिरोमणी श्री गुरू रविदास जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
*संत रविदास जी ने गरीब, असहाय, कमजोर, दलित व महिला को सम्मान देने की बात अपनी वाणी में रखी*
श्री पंवार ने कहा कि संत रविदास जी ने सैंकड़ों वर्ष पहले भी गरीब, असहाय, कमजोर, दलित व महिला को सम्मान देने की बात अपनी वाणी के माध्यम से समाज के सामने रखी। उनकी वाणी सदियों तक प्रासंगिक रहेगी। ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिले सबन का अन्न, छोट बड़े सब बसे, रैदास रहे प्रसन्न। उन्होंने ऐसे राज्य की कल्पना की थी जहां न कोई भूखा रहे तथा सबको खाने के लिए अन्न मिले। इन्हीं सिद्धातों पर चलते हुए मुख्यमंत्री श्री नायब सैनी प्रदेश की जनता की भलाई के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा संतों की जयंती मनाने पर युवा पीढ़ी को संतों की वाणी से प्रेरणा मिलती है जिससे आस्था को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी भी गुरू रविदास के बताए हुए मार्ग पर चलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा आज हमें संकल्प लेना है कि मेहनत और जिम्मेदारी से काम करके समाज को नई दिशा देनी होगी जिससे राष्ट्र आगे बढ़ेगा।
*देशवासियों को युगों-युगों तक प्रेरित करने वाले हैं संत रविदास जी के समानता, सद्भावना व करूणा का संदेश*
श्री पंवार ने कहा कि 648 वर्ष पहले एक ऐसे संत शिरोमणी श्री गुरू रविदास ने धरती पर अवतार लिया जिन्होंने अपनी वाणी व दोहों के माध्यम से समाज को एकसूत्र में बांधने का काम किया है। आज पूरी दुनिया में उनकी जयंती को श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने भक्ति आंदोलन में बढ़चढ़ भाग लिया और उस समय समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ समाज को जागरूक किया। संत रविदास जी ने समानता, सद्भावना व करूणा के जो संदेश दिए वे देशवासियों को युगों-युगों तक प्रेरित करने वाले हैं।
*संत गुरू रविदास जी ने अपनी वाणी में कहा था ‘मन चंगा तो कटौती में गंगा’ उनकी वाणी आज भी प्रासंगिक*
श्री पंवार ने कहा कि संत रविदास जी ने अपनी वाणी और दोहों के माध्यम से समाज के प्रत्येक पक्ष को छुआ है, जो उन्होंने सैंकड़ों वर्ष पहले कहा था आज भी उनकी वाणी प्रासंगिक है। उनकी इस वाणी ने यह सिद्ध किया कि मन चंगा तो कठौती में गंगा यानि यदि मन पवित्र और निर्मल है तो किसी भी स्थान पर किया गया कार्य पवित्र ही होगा। बाहरी आडंबरों की बजाय आंतरिक शुद्धता अधिक महत्वपूर्ण है।













