जिस हिंदू समाज ने केरल में खुद इस्लामिक व्यापारियों को उनकी पूजा के लिए जमीनें दान कर दीं, मस्जिद का निर्माण करा दिया, उसी हिंदू समाज को एक मंदिर के टूटने पर इतना कैसे आंदोलित होना पड़ा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए चार लाख से ज्यादा हिंदुओं को बलिदान देना पड़ा? यह सोचने की बात है और हमें समझ लेना होगा कि संघर्ष केवल मंदिर निर्माण का प्रश्न नहीं है, बल्कि भारत की अस्मिता के साथ जुड़ा हुआ है। अयोध्या में राम लला के मंदिर के लिए देश भर में विश्व का सबसे बड़ा निधि समर्पण अभियान चलाया गया।
अयोध्या में प्रभु राम के जन्म स्थान पर बने मंदिर को नष्ट कर वहां मस्जिद जबरन बना दी गई। लेकिन क्या हिंदू समाज ने इस जबरन सांस्कृतिक अपहरण को स्वीकार कर लिया? ऐसा नहीं हुआ, बल्कि इस सांस्कृतिक अतिक्रमण के विरुद्ध वर्षों तक संघर्ष और बलिदान किया। जिस हिंदू समाज ने केरल में खुद इस्लामिक व्यापारियों को उनकी पूजा के लिए जमीनें दान कर दीं, मस्जिद का निर्माण करा दिया, उसी हिंदू समाज को एक मंदिर के टूटने पर इतना कैसे आंदोलित होना पड़ा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए चार लाख से ज्यादा हिंदुओं को बलिदान देना पड़ा? यह सोचने की बात है और हमें समझ लेना होगा कि संघर्ष केवल मंदिर निर्माण का प्रश्न नहीं है, बल्कि भारत की अस्मिता के साथ जुड़ा हुआ है। राम मंदिर हमारे प्रभु राम के जन्म स्थान से जुडा है। राम अपने जीवन के एक-एक कार्य से समाज में आदर्श स्थापित करते हैं। दुनिया में भारत की पहचान करने के लिए यदि कोई ऐतिहासिक पहचान तलाशी जाए और वह इतनी सरल हो, जिसके नाम मात्र के स्मरण से व्यक्ति को हिंदुस्तान समझ में आ जाए, वो पहचान ही हैं प्रभु राम।