6 जनवरी, 2026 (ओज़ी न्यूज़ डेस्क) : पाकिस्तान की जल जीवनरेखा पर भारत की पकड़ अब कोई दूर की रणनीतिक कल्पना नहीं रही। यह जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों में ठोस रूप ले रही है।
स्पष्ट इरादे का संकेत देते हुए केंद्र ने चिनाब नदी प्रणाली पर चार प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को फास्ट-ट्रैक करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह कदम केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा जम्मू-कश्मीर में कई बांध स्थलों की दो दिवसीय ज़मीनी समीक्षा के बाद उठाया गया है, जिसमें यह स्पष्ट कर दिया गया कि अब तय समयसीमाओं का कड़ाई से पालन होगा।
मामला केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। चिनाब नदी सिंधु बेसिन का हिस्सा है—जो पाकिस्तान की जीवनरेखा मानी जाती है। पाकिस्तान के लगभग तीन-चौथाई जल स्रोत उन पश्चिमी नदियों से आते हैं जो भारत से होकर पाकिस्तान में प्रवेश करती हैं। पाकिस्तान की 90 प्रतिशत से अधिक कृषि इसी बेसिन पर निर्भर है और उसके लगभग सभी बांध व नहरें इसी तंत्र के इर्द-गिर्द बनी हैं। व्यावहारिक रूप से, दस में से नौ पाकिस्तानी उस पानी पर निर्भर हैं जो पहले भारतीय भूभाग से होकर बहता है। यही कारण है कि चिनाब पर हर गतिविधि पर पाकिस्तान की कड़ी नज़र रहती है।
इन परियोजनाओं में सबसे अहम किश्तवाड़ में स्थित पाकल दुल जलविद्युत परियोजना है। 1,000 मेगावाट क्षमता वाली यह परियोजना चिनाब बेसिन की सबसे बड़ी है और 167 मीटर ऊंचाई के साथ भारत का सबसे ऊंचा बांध भी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पश्चिमी नदी पर भारत की पहली भंडारण (स्टोरेज) परियोजना है जो पाकिस्तान की ओर बहती है। चिनाब की एक सहायक नदी पर बनी इस परियोजना का उद्घाटन मई 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। सिंधु जल संधि के प्रभावी रूप से निष्क्रिय होने के बीच केंद्र ने अब इसे दिसंबर 2026 तक चालू करने का आदेश दिया है। इसके चालू होने से भारत को न सिर्फ बिजली उत्पादन, बल्कि जल प्रवाह के समय को नियंत्रित करने की क्षमता भी मिलेगी—जिसे पाकिस्तान लंबे समय से चिंता की नज़र से देखता रहा है।
इसी के समानांतर किरू परियोजना भी किश्तवाड़ जिले में स्थित है। 135 मीटर ऊंचा किरू बांध एक रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है, लेकिन इसकी रणनीतिक अहमियत इस बात में है कि यह ऊपर और नीचे स्थित अन्य परियोजनाओं की श्रृंखला में कैसे फिट होती है। केंद्र ने किरू के लिए भी दिसंबर 2026 की ही समयसीमा तय की है, जिससे साफ है कि दोनों परियोजनाएं एक साथ चालू होने की उम्मीद है।
तीसरी प्रमुख परियोजना क्वार है, जो चिनाब पर ही स्थित एक और रन-ऑफ-द-रिवर बांध है और जिसकी ऊंचाई 109 मीटर है। जनवरी 2024 में एक बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि के तहत निर्माण के लिए चिनाब का सफलतापूर्वक मार्ग परिवर्तन किया गया था—जिस पर पाकिस्तान ने कड़ी नज़र रखी। अब केंद्र ने निर्देश दिया है कि क्वार को मार्च 2028 तक चालू किया जाए।
इसके बाद आता है रतले परियोजना, जो शायद सबसे विवादित है। 850 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना में चिनाब पर 133 मीटर ऊंचा बांध शामिल है और इसके स्पिलवे डिज़ाइन को लेकर पाकिस्तान वर्षों से आपत्ति जताता रहा है। हालिया दौरे के दौरान बिजली मंत्री ने बांध की कंक्रीटिंग के कार्य का शिलान्यास किया, जिससे संकेत मिला कि रतले को अब तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है। 2024 में इस परियोजना के लिए चिनाब का पानी सुरंगों के जरिए मोड़ा गया था और बांध के 2028 तक तैयार होने की उम्मीद है।
इन प्रमुख परियोजनाओं के अलावा भारत दुलहस्ती स्टेज-2 पर भी आगे बढ़ रहा है। इस परियोजना को पिछले दिसंबर पर्यावरण मंत्रालय की समिति से मंज़ूरी मिली थी और यह पहले से चालू दुलहस्ती-1 के बाद विकसित की जाएगी। पाकिस्तान ने हाल में इस मंज़ूरी पर भी आपत्ति जताई है और दावा किया है कि उसे सूचित नहीं किया गया—जिसे भारत ने खारिज कर दिया है।













