2 जनवरी, 2026 (ओज़ी न्यूज़ डेस्क) : मध्य प्रदेश के इंदौर में कम से कम 9 लोगों की मौत के मामले की जांच के बीच शुरुआती रिपोर्ट में यह सामने आया है कि पीने के पानी के नमूनों में ऐसे बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो आमतौर पर सीवर के पानी में मिलते हैं। लैब रिपोर्ट के अनुसार, दूषित पानी के कारण ही इलाके में उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पानी में विब्रियो कॉलरा (Vibrio cholerae), शिगेला (Shigella) और ई. कोलाई (E. coli) बैक्टीरिया पाए गए हैं। ये बैक्टीरिया गंभीर पेट के संक्रमण, तेज दस्त और उल्टी का कारण बनते हैं।
यह प्रकोप भगीरथपुरा इलाके से सामने आया, जिससे इंदौर जैसे शहर में जल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिसने लगातार आठ वर्षों तक देश में स्वच्छता रैंकिंग में पहला स्थान हासिल किया है।
दूषित पानी से फैला दस्त का प्रकोप
इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी के अनुसार, शहर के एक मेडिकल कॉलेज में की गई लैब जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि बीमारी का स्रोत दूषित पेयजल था।
बताया जा रहा है कि इलाके में एक भूमिगत पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवर का पानी पीने के पानी की सप्लाई में मिल गया। अधिकारियों ने बताया कि भगीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य जलापूर्ति लाइन में बड़ा रिसाव पाया गया, जहां कथित तौर पर पाइपलाइन के ऊपर शौचालय बना हुआ था। इसी कारण पानी दूषित हुआ।
जांच समिति का नेतृत्व कर रहे अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने कहा कि भगीरथपुरा की पूरी पेयजल पाइपलाइन नेटवर्क की जांच की जा रही है ताकि अन्य संभावित लीकेज का पता लगाया जा सके।
निरीक्षण के बाद गुरुवार को घरों में साफ पानी की आपूर्ति बहाल कर दी गई है, हालांकि एहतियात के तौर पर लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी गई है।
दुबे ने बताया कि ताजा पानी के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और भगीरथपुरा की घटना से सीख लेते हुए पूरे राज्य के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसे प्रकोप रोके जा सकें।
प्रशासन के अनुसार, स्थानीय निवासियों ने 25 दिसंबर के आसपास पानी से बदबू आने की शिकायत की थी, हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि समस्या कई हफ्तों से बनी हुई थी और बाद में गंभीर हो गई।
शुरुआत में 14 मौतों की सूचना मिली थी, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इनमें से 9 मौतें सीधे तौर पर दूषित पानी से हुए दस्त के कारण हुईं, जबकि अन्य मौतें सह-रोगों या अन्य कारणों से हुई थीं।
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प्रकोप की गंभीर स्थिति
अधिकारियों के अनुसार, अब तक 2,400 से अधिक लोगों में उल्टी-दस्त के लक्षण सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा गुरुवार को किए गए सर्वे में 1,714 घरों और 8,571 लोगों की जांच की गई, जिनमें से 338 लोगों का हल्के लक्षणों के चलते घर पर ही इलाज किया गया।
बीते आठ दिनों में 272 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से 71 को छुट्टी दे दी गई है, जबकि 201 मरीज अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें 32 मरीज आईसीयू में हैं।
एनएचआरसी ने एमपी सरकार को नोटिस जारी किया
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने कहा है कि कई दिनों तक दूषित पानी की शिकायतों के बावजूद सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, जो मानवाधिकार उल्लंघन का गंभीर मामला है।
एनएचआरसी ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
प्रशासन अलर्ट पर
आगे किसी भी तरह के प्रकोप को रोकने के लिए प्रशासन ने शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी तेज कर दी है और अधिकारियों की लापरवाही तथा पुरानी पाइपलाइनों की स्थिति की भी जांच की जा रही है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना को “आपातकाल जैसी स्थिति” बताया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने इंदौर के अस्पतालों का दौरा कर मरीजों की स्थिति की समीक्षा की और बाद में एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।













