नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2025
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के अध्यक्ष सरदार हरमीत सिंह कालका ने जानकारी देते हुए कहा कि आज कमेटी की विशेष जनरल हाउस बैठक में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जिसके तहत तीन पूर्व अध्यक्षों — सरदार मनजीत सिंह जी.के., सरदार परमजीत सिंह सरना और सरदार हरविंदर सिंह सरना — की सदस्यता सर्वसम्मति से रद्द कर दी गई है।
सरदार कालका ने बताया कि यह निर्णय लंबे समय से लंबित शिकायतों की पूरी जांच करने और गुरुद्वारा इलेक्शन डायरेक्टर तथा दिल्ली सरकार से प्राप्त निर्देशों के अनुसार लिया गया है। उक्त शिकायतों में गुरुद्वारों के फंडों के दुरुपयोग और विश्वासघात के गंभीर आरोप शामिल थे।
उन्होंने आगे बताया कि कमेटी के कुल 51 सदस्यों में से 50 जीवित सदस्यों को विस्तृत रिपोर्ट भेजी गई थी, जिनमें से 17 से अधिक सदस्यों ने लिखित सिफारिशें भेजकर दोषी सदस्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इसके बाद इस मामले पर विचार के लिए आज विशेष सत्र बुलाया गया।
सरदार कालका ने कहा, “दोषी सदस्यों को अपने पक्ष में सफाई देने का अवसर प्रदान किया गया था, लेकिन दुख की बात है कि वे उपस्थित नहीं हुए और अपनी नैतिक जिम्मेदारी से विमुख हो गए।”
बैठक के दौरान कई सदस्यों — जैसे सरदार भूपिंदर सिंह भुल्लर, बीबी रंजीत कौर, सरदार गुरदेव सिंह, सरदार इंदरजीत सिंह मॉन्टी और सरदार परविंदर सिंह लक्की — ने स्पष्ट रूप से कहा कि जो लोग गुरुद्वारों के लिए दी गई पवित्र दशवंध (दान राशि) का दुरुपयोग करते हैं, वे सिख समुदाय का नेतृत्व करने के योग्य नहीं हैं।
इसके बाद हाउस ने तीनों पूर्व अध्यक्षों की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द करने का प्रस्ताव पारित किया और इस प्रस्ताव को प्रबंधक अधिनियम के अनुसार दिल्ली सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया।
सरदार कालका ने जोर देते हुए कहा, “यह निर्णय किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सिख धार्मिक संस्थाओं की पवित्रता और नैतिक अखंडता को बनाए रखने के लिए लिया गया है। गुरु के घर का खजाना संगत की पवित्र अमानत है, और जो भी इस विश्वास को तोड़ेगा, उसे कानूनी और नैतिक — दोनों स्तरों पर जवाबदेह ठहराया जाएगा।”
इस निर्णय के साथ, सरदार कालका ने कहा कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने सिख संस्थाओं में पारदर्शिता, ईमानदारी और नैतिकता का एक नया मानदंड स्थापित किया है।













