वैज्ञानिक आचार्य जगदीश चंद्र बोस की 165वीं जयंती मनाई गई
चंडीगढ़ , 30 नवंबर- जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फ़रीदाबाद में आज प्रख्यात भारतीय वैज्ञानिक आचार्य जगदीश चंद्र बोस की 165वीं जयंती मनाई और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। आधुनिक विज्ञान में भारत के अग्रणी और वायरलेस संचार के वास्तुकार के रूप में पहचाने जाने वाले जेसी बोस की विरासत पर एक शोध संवाद सत्र के माध्यम से चर्चा की गई।
इस अवसर पर प्रतिष्ठित वक्ताओं सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर, नई दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. मेहर वान और दिल्ली विश्वविद्यालय के पादप आणविक जीवविज्ञान विभाग की प्रोफेसर परमजीत खुराना ने अपनी विशेषज्ञता साझा की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. सुशील कुमार तोमर ने की।
इससे पहले, कुलपति प्रो. तोमर ने आमंत्रित वक्ताओं के साथ जगदीश चंद्र बोस को पुष्पांजलि अर्पित की और उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया
इस अवसर पर, कुलपति प्रो. तोमर ने जेसी बोस के अंत:विषय शोध एवं विज्ञान में योगदान पर बल दिया और युवा शोधकर्ताओं से उनके जीवन और कार्य से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
डॉ. मेहर वान ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सर जे.सी. बोस की भूमिका पर प्रकाश डाला और उनके जीवन कार्यों पर चर्चा की। प्रो. परमजीत खुराना ने विकासात्मक जीवविज्ञान में हालिया रुझानों पर चर्चा करते हुए पौधों के तंत्रिका तंत्र पर जे.सी. बोस के शोध पर बात की। उन्होंने स्वस्थ पर्यावरण के लिए वनस्पतियों और जीवों के महत्व पर भी जोर दिया।













