रीना सिंगला जी अध्यक्षा अम्बाला राष्ट्रीय महिला परिषद अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू परिषद् ने अरविन्द केजरीवाल की गलत शिक्षा नीति पर प्रेस नोट जारी करते हुए कहा कि भगवान राम अपने तीनों भाइयों के साथ माउंट आबू के घने जंगलों में महर्षि वशिष्ठ आश्रम गुरुकुल में पढ़े थे। पढ़ाई तो जमीन पर बैठकर भी हो जाएगी। हम भी दरियों पर बैठकर पढ़े हैं। इन्हीं सरकारी स्कूलों में पढ़कर बड़े-बड़े नेता बने हैं। बड़े-बड़े आईएएस ऑफिसर बने हैं, बड़े-बड़े आईपीएस ऑफिसर बने हैं। मुख्य मुद्दा तो है सबको शिक्षा देना। अगर स्कूलों को सजाने में लग गए, उससे कुछ नहीं होगा, अंदर मिलने वाला ज्ञान सुंदर होना चाहिए। मन के अंदर की सुंदरता बढ़नी चाहिए। आम आदमी पार्टी दिल्ली में शिक्षण संस्थानों की बिल्डिंगों को सुंदर बनाने की आड़ में बच्चों को आरामपरस्त बना रही है। जीवन संघर्षों से भरा है। बच्चों को मजबूत बनाओ ना कि कोमल। इस उम्र में इतने बड़े सपने देखने की आदत मत डालो बच्चो को। सादा और सात्विक रखो स्कूलों को। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल हमारे देश के भविष्य हमारे बच्चों को खराब कर रहे हैं, उनको बिगाड़ रहे हैं, उनको बचपन से ही मोह माया में फंसा रहे हैं. खुद अरविन्द केजरीवाल जिस आई आई टी में पढ़े हैं, वहां चप्पल पहन कर सादगी से पढ़ना होता है, भूल गए क्या? विद्यार्जन मकसद है विद्या का ना कि विद्यालय का रूप और पोलिश. बच्चों को सात्विक जीवन मिलना चाहिए. इस तरह अरविन्द केजरीवाल सरकारी स्कूलों को चकाचौंध पूर्ण बना कर प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावादे रहे हैं. आम आदमी पार्टी के तो 15 अगस्त के पावन पर्व में भी रंगा रंग कार्यक्रम होते हैं जिसका प्रूफ पानीपत है. बड़ी बड़ी बातें करने वालों के पास देखने सुनने का समय नहीं है. बच्चों की भविष्य को ताक पर लगा कर आम आदमी पार्टी राजनीती कर रही है.
आदर्श विद्यालय का वातावरण शांत, सात्विक, सकारात्मक और अनुशासन से भरा होना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को इससे प्रेरणा मिले, ना कि सजावटी और चका चौंध वाला होना चाहिए जिससे विद्यार्थी पथ भ्रष्ट हो. विद्यार्थी शिक्षा के मंदिर में जा रहे हैं ना कि किसी फाइव स्टार होटल में या किसी म्यूजियम में। विद्यार्थी जीवन हमारे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है। यही वह चरण है, जहां व्यक्ति के जीवन की दिशा एवं दशा तय होती है। अतः विद्यार्थी जीवन में ज्ञान अर्जित करने एवं जीवन के आवश्यक मूल्यों को सीखने पर ज़ोर दिया जाना चाहिए। ज्ञान प्राप्ति, रीति का ज्ञान, नैतिक मूल्य इत्यादि विद्यार्थी जीवन की प्राथमिकता होते हैं। क्योंकि यही ज्ञान एवं यही मूल्य आगे जाकर व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करते हैं और उन्हें सफल बनाते हैं। इसीलिए यह अत्यंत आवश्यक हो जाता है कि विद्यार्थीकाल में व्यक्ति को सही ज्ञान एवं सही मार्गदर्शन प्राप्त हो। शिक्षा मनुष्यों को सशक्त बनाती है और उन्हें जीवन की चुनौतियों का कुशलता से सामना करने के लिए तैयार करती है। अब हर किसी को अपने बच्चों को पढ़ाना अनिवार्य है। ‘निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम’ के नाम से यह कानून 2009 में लाया गया। शिक्षा का अधिकार’ हमारे देश के संविधान में वर्णित मूल अधिकारों में से एक है।यह संविधान बच्चे के समग्र विकास, बच्चे के ज्ञान, सम्भावना और प्रतिभा निखारने तथा बच्चे की मित्रवत प्रणाली एवं बच्चा केन्द्रित ज्ञान प्रणाली के द्वारा बच्चे को डर, चोट और चिंता से मुक्त करने को संकल्पबध्द है।।शिक्षा का लक्ष्य मनुष्य के अंदर संस्कार, सद्गुण और आत्मनिर्भर बनाना है। किन्तु आज हम आधिकतर बच्चों को आज की शिक्षा से अमर्यादित, अहंकारी आधी बनते देखते हैं. उनके नजरों में वह उतना ही महान होता है जो ज्यादा बाहरी आडंबर करता है. शिक्षा व्यवसाय बनाकर रख दी है. बाहरी आडंबर के चलते हमारे बच्चे अपनी सभ्यता को भूलकर पाश्चात्य शिक्षा के प्रभाव में स्वयं को उद्दंड स्वभाव वाले बनाने के रास्ते पर चल पड़े हैं। आज बच्चे तर्कहीन मशीन, रट्टू तोते बनते जा रहे हैं. इस तरह वे अपने बौद्धधिक स्तर का विकास नहीं कर पाते। और समाज में भी पिछड़ जाते हैं. हमारी पढ़ाई ऐसी होनी चाहिए जिससे राष्ट्र निर्माण हो सके. बच्चे आत्मनिर्भर बन सकें बच्चे निम्न विचारों का त्यागकर सकें। मानवता का प्रसार हो विध्यार्थियों का मानसिक व शारीरिक विकाश हो सके। शिक्षा तब तक पूरी नहीं हो सकती जब तक मनुष्यों में दया, प्रेम, अपनापन, उदारता जैसे गुण विकसित नही हो जाते, क्यूंकी इन गुणो के आभाव में मनुष्य पशु समान है. अत: अरविन्द केजरीवाल जी सरकारी स्कूलों को चका चौंध पूर्ण बना कर प्राइवेट स्कूलों को बढ़ावा ना दो।













