– नया शैक्षिक सत्र शुरू, अब तक 85 में से 25 टाइटल की किताबें ही पहुंचीं जिस कारण छात्र बिना पढ़ाई किये खाली बैठ वापस घर लौट रहे हैं
संगरूर, (सुभाष भारती): पहले कोरोना काल के कारण स्कूल बंद रहे, जब स्कूल खुले तो विधानसभा चुनाव की तैयारियों में अफसर जुट गए। नतीजा यह हुआ कि सरकारी स्कूलों में मिलने वाली किताबें छपने में देरी हो गई। लिहाजा 12 दिन से नया सेशन शुरू होने के बावजूद स्कूलों में पूरी किताबें नहीं पहुंच सकी हैं। अधिकतर कक्षाओं के छात्र सीनियर छात्रों से पुरानी किताबें लेकर पढ़ाई कर रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या 10वीं और 12वीं के छात्रों को उठानी पड़ रही है क्योंकि अभी तक इन दोनों कक्षाओं के पेपर नहीं हुए हैं, जिस कारण छात्र पुरानी किताबें भी नहीं ले सकते। हालात यह हैं कि पहली से बारहवीं कक्षा में मिलने वाली 85 टाइटल (किताबों) में से पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड डिपो में मात्र 25 टाइटल ही मुहैया करवा सका है। दूसरी ओर 8वीं और 11वीं कक्षा की एक भी किताब नहीं पहुंच सकी है। डिपो को मिली किताबों में से कई किताबें स्कूलों तक नहीं पहुंचाई जा सकी हैं। मालेरकोटला जिले के ही तीन ब्लॉकों तक किताबें पूरी पहुंची हैं। संगरूर और बरनाला के ब्लॉक अभी पूरी तरह से कवर नहीं किए जा सके हैं, ऐसे में किताबों की कमी के कारण बच्चों की शिक्षा पर बुरा असर पडऩा स्वाभाविक माना जा रहा है। किताबों के बगैर बच्चों को पाठ्यक्रम समझाना आसान नहीं है। इस कारण स्कूलों में शिक्षा की गति भी धीमी पड़ती जा रही है।
पहली बार यूकेजी, एलकेजी के लिए भी किताबें की जा रहीं तैयार
सेशन शुरू होने के बाद शिक्षा बोर्ड की ओर से 22 ऐसी किताबों की सूची जारी की गई है जिन्हें रिवाइज किया जाएगा। इनमें पहली, दूसरी, आठवीं, नौवीं व दसवीं की किताबें शामिल हैं। इस बार बोर्ड की ओर से यूकेजी, एलकेजी के लिए भी किताबें तैयार की जा रही हैं जो इस सेशन में पहली बार तैयार होंगी। इसके टाइटल और सिलेबस फाइनल होना बाकी है। इससे पहले बोर्ड की ओर से पहली से बारहवीं की किताबें ही पब्लिश की जाती रही हैं। वहीं अभिभावकों का कहना है कि किताबें न आने से बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है, इस तरफ प्रदेश सरकार को ध्यान देना चाहिए।
किताबें न पहुंचने से दाखिलों पर पड़ रहा असर – डेमोक्रटिक टीचर फ्रंट
डेमोक्रटिक टीचर फ्रंट (डीटीएफ) के जिला प्रधान बलवीर लौंगोवाल का कहना है कि एक तरफ अध्यापकों पर सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने और अच्छे नतीजे लाने का दबाव बनाया जाता है परंतु किताबें सही समय पर नहीं पहुंचती हैं। कई स्कूलों में एक भी किताब नहीं पहुंची है जिस कारण बच्चे स्कूल आकर अगले दिन नहीं आते हैं। इसका असर दाखिलों पर पड़ रहा है। इसके लिए सरकार को जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलबी करनी चाहिए कि नियमों अनुसार 1 अप्रैल को स्कूलों में पहुंचनी वाली किताबें अभी तक क्यों नहीं पहुंची हैं?
ये हैं हालात – संगरूर डिपो से तीन जिलों संगरूर, मालेरकोटला व बरनाला को जाती हैं 19 लाख किताबें
संगरूर शिक्षा बोर्ड के डिपो से संगरूर, मालेरकोटला और बरनाला जिले में करीब 19 लाख किताबें स्कूलों में पहुंचाई जाती हैं। डिपो से किताबें ब्लॉक स्तर पर पहुंचाई जाती हैं जहां से शिक्षा अधिकारी स्कूलों तक पहुंचाते हैं, ऐसे में किताबों को स्कूलों तक पहुंचाने में कई दिन लग जाते हैं।
चुनावों के कारण किताबों की छिपाई का टेंडर देरी से हुआ – डिपो मैनेजर अमनदीप सिंह
शिक्षा बोर्ड डिपो के कार्यकारी डिपो मैनेजर अमनदीप सिंह का कहना है कि डिपो को प्राप्त हुई किताबें ब्लॉकों में पहुंचाई जा रही हैं। रोजाना किताबें डिपो को प्राप्त हो रही हैं। उन्होंने कहा कि चुनावों के कारण किताबों की छिपाई का टेंडर देरी से हुआ है लेकिन अब किताबेें पहुंचाने में तेजी हो गई है। फिलहाल स्कूलों में अध्यापक पुराने बच्चों से किताबें लेकर काम चला रहे हैं।
छठी से 12वीं : विषय-64, प्राप्त किताबें-19, पेंडिंग-45
प्राइमरी : विषय-21, प्राप्त किताबें-6, पेंडिंग-1












