छिंदवाड़ा(भगवानदीन साहू)- संत श्री आशारामजी आश्रम लिंगा में साधकों ने श्री मद भगवद गीता के 7 वें अध्याय का पाठ कर तर्पण किया। गत दिवस ग्राम के प्रतिष्ठित व्यक्ति श्री दसरथ मोरे का परलोक गमन हो गया। उनकी आयु 80 वर्ष थी । श्री मोरे जी ने ही अपनी बेशकीमती उपजाऊ जमीन लिंगा आश्रम संस्था को दानस्वरूप भेंट की थी । आज इस जमीन पर भव्य आश्रम शोभायमान है । समय-समय पर यहाँ सत्संग , भंडारा , औषधालय , जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री भेंट की जाती है। प्रतिदिन कई श्रद्धालु भक्तों का यहाँ आवागमन होता है। क्षेत्र के हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है । पूज्य बापूजी का यह जिले में प्रथम आश्रम है इसके बाद खजरी औऱ गुरुकुल की शुरुआत हुई । श्री मोरे जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उनकी आध्यात्मिक रुचि उच्च कोटि की थी , इन्होंने अपनी लाडली बेटी प्रतिमा को आध्यात्मिक राह पर चलने के लिए प्रेरित किया । आज प्रतिमा साध्वी हैं और कुशल वक्ता के साथ-साथ आश्रम संचालक भी हैं। देश के कोने कोने में इनके सत्संग आयोजित होतें हैं। जिले के लाखों साधक लिंगा ग्रामवासियों के आभारी हैं।जिन्होंने सर्वप्रथम पूज्य बापूजी का सत्संग सन 1993 में छिंदवाड़ा में आयोजित करवाया था जिसमें मोरे जी का विशेष योगदान था । समिति के सदस्यों ने मोरे जी की अंतिम क्रिया पूर्ण वैदिक रूप से की जो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय रही। आज उन दानवीर , दिव्य आत्मा के मोक्ष हेतु श्री मदभगवद गीता के 7 वें अध्याय का पाठ कर पुण्य अर्पण किया । इस अवसर पर साध्वी रेखा बहन , साध्वी प्रतिमा बहन , खजरी आश्रम के संचालक जयराम भाई , गुरुकुल की संचालिका दर्शना खट्टर, समिति के अध्यक्ष मदनमोहन परसाई , युवा सेवा संघ के अध्यक्ष दीपक दोईफोड़े , वरिष्ठ साधक अशोक कराडे , विलास घोंघे , नारायण ताम्रकर , अशोक मोरे , सुभाष इंग्ले , महिला समिति से सुमन दोईफोड़े , डॉ. मीरा पराडकर , छाया सूर्यवंशी , करुणेश पाल ,शकुंतला कराडे , सुनीता शिवहरे , पूनम मक्कड़ , वनिता सनोडिया मुख्य रूप से उपस्थित थे ।












