नयी दिल्ली, 4 अक्तूबर
सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सख्ती दिखाई। सुप्रीम कोर्ट ने ने पंजाब का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील से स्पष्ट तौर पर कहा, ‘अदालती आदेश (हरियाणा के पक्ष में) कायम है। इसलिए, आपको कुछ कदम उठाने होंगे।… समाधान निकालें अन्यथा शीर्ष अदालत को इस मामले में कुछ करना होगा। हमें 20 साल तक लटके रहने वाला कोई समाधान मत दीजिए कि यह आएगा और वह आएगा। आपको आज ही समाधान ढूंढ़ना होगा।’ अदालत ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख जनवरी 2024 के लिए निर्धारित की है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से यह भी कहा कि वह पंजाब में नहर के लिए आवंटित जमीन का सर्वेक्षण कराये, ताकि पता चले कि कितना काम हुआ है। अदालत ने पंजाब से सर्वेक्षण में सहयोग को कहा। जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र से नहर के निर्माण को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच बढ़ते विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता प्रक्रिया को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाने को भी कहा।
पीठ ने कहा- हम क्रियान्वयन को लेकर चिंतित
पीठ ने कहा, ‘हम पंजाब के हिस्से में एसवाईएल नहर के निर्माण के आदेश के क्रियान्वयन को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि हरियाणा पहले ही नहर का निर्माण कर चुका है।’ हरियाणा का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील श्याम दीवान के कड़े विरोध के बावजूद, खंडपीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से 2 महीने में एसवाईएल नहर के लिए पानी की उपलब्धता के संबंध में ‘कुछ जानकारी’ प्रस्तुत करने को कहा।













