(सुभाष भारती): पंजाब में स्थित राइस मिलर्स को पहले तो चावल स्टोरेज के लिए जगह की कमी ने परेशान किया और फिर बारदाने की कमी और अब एफसीआई द्वारा परमल चावल की जगह फोर्टिफाइड चावल लेने के जारी किए हुकमों ने राइस मिलर्स की नींद उड़ा दी है। राज्य में लगभग 4300 राइस मिलर्स हैं जिनमें पंजाब में स्थित खाद्यान ऐजंसियों द्वारा धान की मिलिंग के लिए जो धान लगाया था उसका अभी तक 50 से 60 फीसदी कार्य ही पूरा हुआ है और बाकी बचे 40 प्रतिशत धान की शैलिंग का कार्य अभी बाकी है। अब हाल ही में एफसीआई द्वारा जारी हुए नये फरमान से जहां राइस मिलों में धान मिलिंग का कार्य रूक गया है। धान मिलिंग का कार्य रूकने से जहां राइस मिलर्स को तो आर्थिक नुक्सान होगा ही वहीं राज्य सरकार को भी भारी नुक्सान होगा। अगर शैलर मालिक धान शैलिंग के लिए स्टोर किए धान का कार्य राज्य की खाद्यान ऐजंसियों के साथ किए एग्रीमेंट के मुताबिक 31 मार्च तक पूरा न कर पाये तो शैलर डिफालटर (बलैक लिस्ट) हो सकते हैं, इसलिए राज्य में स्थित प्रत्येक शैलर मालिक को डिफालटर होने से बचने के लिए जिस ऐजंसी का धान उसके पास स्टोर है उस ऐजंसी को नोटिस देकर सूचित करे कि जो धान जिन शर्तों पर एग्रीमेंट करके शैलिंग के लिए हमें दिया गया था उन शर्तों पर वह अपना चावल देने के लिए तैयार हैं और अगर सरकार बारदाने की समस्या का समाधान समय रहते कर दे तो वह अपना कार्य समय पर पूरा कर सकते हैं।

उधर राइस मिलर्स के प्रदेशाध्यक्ष भारत भूषण बिंटा का कहना है कि शैलर मालिकों के पास उनके शैलरों में फोर्टिफाइड चावल तैयार करने के लिए पर्याप्त मशीनरी व स्टाफ नहीं है। एफसीआई द्वारा अचानक ही शैलर मालिकों को एफक्यू चावल की जगह फोर्टिफाइड चावल तैयार करके देने के जारी किए आदेश के चलते एकदम पर्याप्त मशीनरी व स्टाफ का प्रबंध करने में भी असमर्थ हैं, क्योंकि फोर्टिफाइड चावल तैयार करने के लिए मशीनरी की कीमत ही करोड़ों में हैं और साथ ही इस मशीनरी को आपरेट करने के लिए माहिर आप्रेटरों की व्यवस्था करना समय के अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर एफसीआई ने यह तुगलकी फरमान वापस न लिया तो फोर्टिफाइड चावल देने से असमर्थ राज्य के सभी शैलर मालिक अपने मिल में पड़ा बकाया धान खाद्यान ऐजंसियों को वापस उठवाने का ऐलान करने से गुरेज नहीं करेंगे।

